ऐतिहासिक श्री नागणेची जी माता मंदिर की बंद लिफ्ट और जर्जर व्यवस्था के खिलाफ फूटा आक्रोश

ऐतिहासिक श्री नागणेची जी माता मंदिर की बंद लिफ्ट और जर्जर व्यवस्था के खिलाफ फूटा आक्रोश
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  • श्रद्धालुओं ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

बीकानेर, 16 जून। बीकानेर के सुप्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक श्री नागणेची जी माता मंदिर की लिफ्ट लंबे समय से बंद होने, मंदिर परिसर की जर्जर स्थिति तथा इसके कारण वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों एवं हृदय रोगियों को हो रही भारी असुविधा के विरोध में आज श्रद्धालुओं का गुस्सा फूट पड़ा। क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और माता के भक्तों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष एकत्रित होकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के पश्चात जिला कलेक्टर एवं देवस्थान विभाग के उच्चाधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर इस गंभीर समस्या पर शीघ्र दंडात्मक व सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई।

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लिफ्ट बंद होने से बिना दर्शन लौट रहे बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालु
सौंपे गए ज्ञापन में आंदोलनकारियों ने प्रशासन को अवगत कराया कि मंदिर की लिफ्ट लंबे समय से तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी है। चूंकि निज मंदिर अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए घुटनों के दर्द से पीड़ित बुजुर्ग, दिव्यांग, चलने-फिरने में असमर्थ श्रद्धालु एवं हार्ट पेशेंट सीढ़ियां चढ़कर माता के दर्शन करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। स्थिति इतनी निराशाजनक हो चुकी है कि प्रतिदिन दर्जनों श्रद्धालुओं को बिना दर्शन किए ही भारी मन से मंदिर की ढलान से वापस लौटना पड़ रहा है, जिससे आमजन की धार्मिक भावनाएं बुरी तरह आहत हो रही हैं।

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छत से टपकता है पानी, जर्जर परिसर से जनसुरक्षा को खतरा
लिफ्ट के अलावा श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रबंधन और देवस्थान विभाग की घोर लापरवाही को उजागर करते हुए पूरे परिसर के रखरखाव पर चिंता व्यक्त की।

जर्जर ढांचा: ज्ञापन में बताया गया कि वर्षा के दिनों में मुख्य मंदिर की छत से पानी टपकता है।

क्षतिग्रस्त देवस्थान: परिसर में स्थित महादेव मंदिर, चामुंडा माता मंदिर एवं चारों तरफ बने बरामदे अत्यंत जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। श्रद्धालुओं ने इसे जनसुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर विषय बताते हुए तुरंत तकनीकी निरीक्षण (Technical Inspection) करवाकर जीर्णोद्धार कार्य शुरू कराने की पुरजोर वकालत की।

श्रद्धालुओं द्वारा रखी गईं प्रमुख मांगें
प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी पांच सूत्रीय मांगें प्रमुखता से रखीं:

  • मंदिर की खराब लिफ्ट को युद्धस्तर पर ठीक करवाकर तत्काल चालू किया जाए।
  • वरिष्ठ नागरिकों एवं व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले दिव्यांगजनों के लिए सीढ़ियों के पास रैंप (Ramp) का निर्माण कराया जाए।
  • मंदिर परिसर, छत की सीपेज तथा अन्य जर्जर सहायक देवस्थान भवनों का पूर्ण जीर्णोद्धार (Renovation) हो।
  • बढ़ती भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारू दर्शन के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं।
  • देवस्थान विभाग द्वारा मंदिर के विकास और सौंदर्यकरण के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया जाए।

मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी: इस महत्वपूर्ण प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान हनुमान प्रसाद शर्मा (एडवोकेट), दौलत सिंह राठौड़, प्रेम वशिष्ठ, पवन चांडक, एडवोकेट नीतू जैन, हेमंत जैन, राम किशन दुबे, कैलाश सियाग, नेमचंद्र नाई, महेश बावेचा, ओ.पी. व्यास, दिनेश लखोटिया, महेंद्र सिंह, एस.एस. शर्मा, संजय भार्गव, कृष्ण भटनागर, प्रेम सोनगरा, राजेश पंडित सहित बड़ी संख्या में श्री नागणेची जी माता के भक्तगण एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही लिफ्ट को चालू करने एवं मंदिर की मरम्मत संबंधी मांगों पर धरातल पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं दिखी, तो वे लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण जन आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन एवं संबंधित विभाग की होगी।

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