पीबीएम के श्वसन रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गुंजन सोनी ने बचाया 58 वर्षीय महिला का जीवन

पीबीएम के श्वसन रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गुंजन सोनी ने बचाया 58 वर्षीय महिला का जीवन
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  • दूरबीन से फेफड़े से निकाली सात साल पुरानी सुपारी

बीकानेर, 16 जून। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध पीबीएम अस्पताल के श्वसन रोग विभाग ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ चिकित्सा मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग के चिकित्सकों ने सात वर्षों से गंभीर रूप से पीड़ित एक 58 वर्षीय महिला को नया जीवन दिया है। रामदेवरा निवासी यह महिला पिछले सात सालों से निरंतर श्वास संबंधी गंभीर तकलीफों से जूझ रही थी, जिसे डॉक्टरों ने अथक प्रयास के बाद ठीक कर दिया।

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पीबीएम पहुंचने से पहले महिला लगातार खांसी, बार-बार निमोनिया होना, सीने में तेज दर्द और सांस लेने में भारी परेशानी की शिकायत से त्रस्त थी। कई बड़े शहरों में महंगे उपचार के बावजूद उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ था। महिला ने जोधपुर, फलोदी सहित विभिन्न स्थानों पर नामचीन चिकित्सकों से परामर्श लिया था। यहाँ तक कि उसकी सीटी स्कैन की रिपोर्ट मुंबई के विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी भेजी गई थी, जहाँ चिकित्सकों ने उसे टीबी (तपेदिक) होने की आशंका जताई थी और उसी अनुरूप इलाज चल रहा था।

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जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा: फेफड़े में फंसी थी एक इंच की सुपारी
लगातार मिल रही निराशा के बाद रिश्तेदारों की सलाह पर महिला पीबीएम अस्पताल के श्वसन रोग विभाग पहुंची। यहाँ विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. गुंजन सोनी ने केस को गंभीरता से लेते हुए उसकी नए सिरे से विस्तृत जांच करवाई।

जांच का परिणाम: आधुनिक डायग्नोस्टिक्स की मदद से डॉ. सोनी ने पाया कि महिला के फेफड़े के भीतर करीब एक इंच लंबी सुपारी फंसी हुई है। यह सुपारी पिछले सात वर्षों से फेफड़े के मार्ग को अवरुद्ध कर रही थी और उसकी तमाम जानलेवा शारीरिक परेशानियों का मुख्य कारण बनी हुई थी।

डेढ़ घंटे चला जटिल ऑपरेशन, क्रश करके निकाली गई सुपारी
सच्चाई सामने आते ही डॉ. गुंजन सोनी ने बिना समय गंवाए अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ ‘ब्रोंकोस्कोपी’ (दूरबीन पद्धति) के माध्यम से एक बेहद जटिल प्रोसीजर को अंजाम दिया। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस अत्यंत संवेदनशील ऑपरेशन के दौरान फेफड़े की दीवारों को बिना नुकसान पहुंचाए, भीतर फंसी सुपारी को बेहद सावधानीपूर्वक क्रश (टुकड़े) करके पूरी तरह बाहर निकाल लिया गया। सफल प्रक्रिया के तुरंत बाद महिला ने राहत की सांस ली और उसकी स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा।

महिला के पति ने भावुक होते हुए बताया कि देश के कई बड़े अस्पतालों के चक्कर काटने और लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जब मर्ज समझ नहीं आया, तब पीबीएम के डॉ. गुंजन सोनी उनके परिवार के लिए भगवान का रूप बनकर सामने आए। उन्होंने पूरी चिकित्सा टीम का कोटि-कोटि आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत हुआ निःशुल्क इलाज
पूरी टीम का रहा सराहनीय योगदान: राहत की बात यह रही कि महिला का यह संपूर्ण और खर्चीला उपचार ‘मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना’ के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया। इस ऐतिहासिक और सफल चिकित्सा ऑपरेशन में विभागाध्यक्ष डॉ. गुंजन सोनी के साथ उनकी टीम के सहयोगी डॉ. अंकित, डॉ. वसुंधरा, डॉ. मनुदेव, डॉ. प्रवेश, डॉ. दिनेश, डॉ. विजय, नर्सिंग स्टाफ मंजू तथा हेल्पर विनोद ने भी महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाई।

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