पर्युषण पर्वराज शुरू- जप-तप के साथ पांच कर्तव्यों की आराधना पर जोर
पर्युषण पर्वराज शुरू- जप-तप के साथ पांच कर्तव्यों की आराधना पर जोर


- साध्वी प्रीतिसुधा ने अमारि प्रवर्तन व क्षमापना को बताया पर्युषण का आधार
बीकानेर, 8 सितंबर। तपागच्छीय गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरिश्वरजी महाराज साहेब की आज्ञानुवर्तिनी साध्वीश्री प्रीतिरत्ना, साध्वीश्री प्रीतिसुधा एवं साध्वीश्री प्रीतियशा महाराजसा (ठाणा-3) की पावन निश्रा में रांगड़ी चौक स्थित पौषधशाला में मंगलवार से पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर जिनालयों में पूजा-अर्चना के बाद आयोजित धर्मसभा में साध्वीश्री प्रीतिसुधा ने पर्युषण के आठ दिनों की आराधना और पांच मुख्य कर्तव्यों की विस्तार से व्याख्या की।


पर्युषण के पांच प्रमुख कर्तव्य (साध्वीश्री प्रीतिसुधा का उद्बोधन)
अमारि प्रवर्तन (जीवदया व अहिंसा): प्राणिमात्र के प्रति दया भाव रखना। प्रत्यक्ष हिंसा के साथ-साथ जल और बिजली के अनावश्यक उपयोग से होने वाली अप्रत्यक्ष सूक्ष्म जीवहिंसा से भी बचना चाहिए। शुद्ध और संयमित आहार-विहार ही धर्म का मूल है।


साधर्मिक वात्सल्य: साधर्मिक भाइयों के प्रति प्रेम, भक्ति और सेवा का भाव रखना। समाज में परस्पर सहयोग और उत्थान के लिए अपनी सामर्थ्य अनुसार कार्य करना धर्म का अंग है।
क्षमापना: मन, वचन और काया से हुई त्रुटियों के लिए सच्चे दिल से क्षमा मांगना और दूसरों को क्षमा करना। औपचारिक क्षमा के स्थान पर व्यवहार में बदलाव लाना आवश्यक है।
अट्ठम तप (तप व स्वाध्याय): तप की शक्ति को समझाते हुए श्रद्धालुओं को अट्ठम तप (तेला), आयंबिल, एकासना और नियमित स्वाध्याय व माला जप करने की प्रेरणा दी गई।
चैत्य परिपाटी: श्रीसंघ के साथ सामूहिक रूप से विभिन्न जिनालयों की यात्रा कर प्रभु दर्शन व भक्ति करना।
तप-आराधना और धार्मिक अनुष्ठान
चातुर्मास लाभार्थी परिवार के सुरेंद्र बद्धाणी व शांतिलाल सेठिया ने बताया कि पर्युषण के प्रथम दिन 50 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने तप-आराधना हेतु साध्वीश्री से पचक्खाण ग्रहण किया।
तपस्या व आयंबिल: क्रमिक अट्ठम तप के तहत शशि (पत्नी राजेंद्र कोचर) द्वारा तेला की तपस्या की गई। आज का आयंबिल मंजू दफ्तरी द्वारा संपन्न हुआ, जबकि आगामी आयंबिल का लाभ इंदिरादेवी सेठिया लेंगी।
श्रीसंघ पूजा: आज की श्रीसंघ पूजा का लाभ नंदकिशोर-हुकुमचंद कोचर परिवार ने प्राप्त किया।
आत्मानंद जैन सभा चातुर्मासिक समिति द्वारा आयोजित आमिल व प्रवचन में शांतिलाल हनु कोचर, अजय बैद, राजेंद्र कोचर, कवी कोचर, विनोद देवी, प्रभा देवी, मंजू बैद, विजय कोचर व मनोज कोचर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
