साध्वी श्री कीर्तियशा जी का संथारा सम्पन्न, प्रयाण यात्रा में उमड़े श्रद्धालु

प्रयाण यात्रा में उमड़े श्रद्धालु
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quicjZaps 15 sept 2025
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गंगाशहर , 29 मई। गंगाशहर सेवा केन्द्र में विराजित साध्वी श्री कीर्तियशा जी का आज अंतिम संस्कार पुरानीलेन ओसवाल मुक्तिधाम में सुबह किया गया। 28 मई बुधवार को सायं 7 बजे चोविहार प्रत्याख्यान व तिविहार संथारे में देवलोकगमन हो गया। आचार्य श्री महाश्रमण जी की आज्ञा से दिनांक 27/05/2025 को दोपहर 3:47 बजे तिविहार संथारा का प्रत्याख्यान उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमल कुमार जी ने करवाया था।

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साध्वियों ने गीतिका का संगान करके साध्वी श्री कीर्तियशा जी के गुणों का यशज्ञान

साध्वी श्री कीर्तियशा जी की प्रयाण यात्रा से पूर्व उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमल कुमार जी, सेवा केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी विशद प्रज्ञा जी, साध्वी श्री लब्धियशा जी, शासन श्री साध्वी मंजूप्रभा जी, शासन श्री साध्वी कुन्थुश्री जी की सहवृति साध्वियां एवं शासन श्री शशिरेखा एवं साध्वी श्री मृदुला श्री जी तथा ,शासन श्री बसंत प्रभा जी की सहवृति साध्वियां एवं साध्वी श्री जिनबाला ठाणा चार सहित सभी के सहवृति साध्वियों ने गीतिका का संगान करके साध्वी श्री कीर्तियशा जी के गुणों का यशज्ञान किया।

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गंगाशहर के डागा परिवार में जन्मी 63 वर्षीय साध्वीश्री कीर्तियशा जी पिछले कुछ वर्षों से असाध्य बिमारी से जूझ रही थी। कीर्तियशा जी बहुत ही समता भाव से स्वाध्याय करते हुए जीवन जी रही है। संथारे का समाचार सुनते ही दर्शनार्थियों का तांता लग गया है। अभी गंगाशहर में तेरापंथ समाज के 6 साधू व 40 साध्वियां प्रवास कर रही हैं। सोहनलाल जी झमकू देवी डागा की पुत्री कस्तूरी ( मुमुक्षु करुणा ) का जन्म 20 अक्टूबर 1962 को गंगाशहर में हुआ। तेरापंथ के महाप्रतापी आचार्य श्री तुलसी के कर कमलों से 10 नवम्बर 1986 को लाडनूं में हुयी। अपने साध्वी काल में मेवाड़, मारवाड़, हरियाणा, पंजाब, थली प्रांत की खूब यात्राएं की।

तेरापंथी सभा गंगाशहर, महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद, किशोर मंडल, कन्या मंडल आदि संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने अपनी भागीदारी निभाई

 

साध्वी श्री कीर्तियशा जी की प्रयाण यात्रा आज दिनांक 29/05 गुरूवार को प्रातः 8:00 बजे शान्ति निकेतन सेवा केन्द्र से रवाना हो कर भंसाली भवन से होकर बोथरा भवन के बाहर उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमल कुमार जी स्वामी ने प्रेरक उद्बोधन दिया व मंगलपाठ सुनाया। तत्पश्चात बैकुंठी यात्रा मुख्य बाजार से होते हुए पुगलिया गली से ओसवाल मुक्तिधाम पंहुची जहाँ पार्थिव देह का अंतिम अग्नि संस्कार हुआ। मुखाग्नि उनके भाई धर्मचन्द , आशकरण डागा ( भाई ), संजय , महेंद्र, पंकज , मुकेश डागा ( भतीजे ) व चिराग , विभु , गर्वित ( पौत्र ) ने दी। ताराचन्द सेठिया , देवचंद भादानी , पारस भूरा ( दामाद ) सहित देश भर से आये परिजन इस प्रयाण यात्रा में सैकड़ों लोगों (पुरुष व महिलाओँ ) की उपस्थिति रही। इस प्रयाण यात्रा में तेरापंथी सभा गंगाशहर, महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद, किशोर मंडल, कन्या मंडल आदि संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने अपनी भागीदारी निभाई।

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