भारतीय संस्कृति में सूफ़ी परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब पर बीकानेर में विचार गोष्ठी संपन्न

भारतीय संस्कृति में सूफ़ी परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब पर बीकानेर में विचार गोष्ठी संपन्न
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quicjZaps 15 sept 2025
STBA 5 JUNE 2026

बीकानेर, 4 मई। मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक समन्वय को समर्पित एक विशेष विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह सोमवार को अमरसिंहपुरा स्थित अस्मत अमीन सभागार में आयोजित किया गया। सोशल प्रोग्रेसिव सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “भारतीय संस्कृति में सूफ़ी परंपरा का प्रभाव एवं गंगा-जमुनी तहज़ीब में सूफ़ी योगदान” रहा।

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डॉ. सदफ़ सिद्दीक़ी का हुआ सम्मान
समारोह के दौरान डॉ. सदफ़ सिद्दीक़ी को उनके शैक्षणिक एवं साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। युवा साहित्यकार इमरोज़ नदीम ने उनका परिचय प्रस्तुत करते हुए उनके कार्यों पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व संस्था अध्यक्ष नदीम अहमद नदीम ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि ऐसे बौद्धिक विमर्श समाज में सकारात्मक चिंतन को प्रोत्साहित करते हैं।

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सूफ़ीवाद: इंसानियत और प्रेम का मार्ग
मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मन मोहन सिंह यादव ने सूफ़ी परंपरा की महत्ता बताते हुए कहा कि सूफ़ी संतों ने समाज को एकता और आध्यात्मिक ऊँचाई का मार्ग दिखाया है। उन्होंने जोर दिया कि सूफ़ीवाद मानवीय जीवन को सरल और सहज बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है। विशिष्ट अतिथि मोहम्मद सादिक़ ने गंगा-जमुनी तहज़ीब को भारत की साझा विरासत का सबसे सशक्त प्रतीक बताया।

उर्दू: भारतीयता और सद्भाव की भाषा
विचार गोष्ठी के मुख्य वक्ता उर्दू स्कॉलर अनीसुद्दीन सिद्दीकी ने उर्दू भाषा के भारतीय मूल पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा:

उर्दू पूर्णतः एक भारतीय भाषा है जिसने देश की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत किया है। आज़ादी से पहले उर्दू साहित्य में हिंदू साहित्यकारों का योगदान अतुलनीय रहा है। उर्दू किसी एक धर्म की नहीं, बल्कि ‘भारतीयता’ की भाषा है।

साझा विरासत पर मंथन
वक्ताओं ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और निज़ामुद्दीन औलिया जैसे महान सूफ़ी संतों की शिक्षाओं का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि इन संतों ने धर्म और जाति से ऊपर उठकर इंसानियत को सर्वोपरि माना, जिसकी प्रासंगिकता आज के दौर में और भी बढ़ गई है।

गरिमामय उपस्थिति: कार्यक्रम में संजय जनागल, संजय श्रीमाली, डॉ. आदित्य शर्मा, एडवोकेट इसरार हसन कादरी, पीयूष यादव सहित शहर के अनेक बुद्धिजीवी, साहित्यप्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में अरमान नदीम ने सभी का आभार व्यक्त किया।

 

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