कौशल विकास प्रशिक्षण स्वरोजगारोन्मुखी शिक्षा का आधार – कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे
कौशल विकास प्रशिक्षण स्वरोजगारोन्मुखी शिक्षा का आधार - कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे


- विद्यार्थियों ने टेक्सटाइल, फ़ूड एंड न्यूट्रीशन व एक्सटेंशन एजुकेशन में तैयार किए अनूठे उत्पाद
बीकानेर, 26 मई। स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय (कम्यूनिटी कॉलेज) में विद्यार्थियों द्वारा तैयार उत्पादों की एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। मंगलवार को इस प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए और विद्यार्थियों से रू-ब-रू होते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने कहा कि कौशल विकास प्रशिक्षण ही वास्तव में स्वरोजगारोन्मुखी शिक्षा का मुख्य आधार है।


कुलगुरु ने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि हुनरमंद शिक्षा विद्यार्थी के भविष्य को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाती है। विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित व अन्य अनूठे उत्पाद इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि उन्होंने किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक व व्यावसायिक पाठ्यक्रम को भी पूरी गहराई से सीखा है। इस प्रायोगिक ज्ञान का उपयोग वे भविष्य में अपने जीवन को बेहतर बनाने और स्वयं का उद्यम स्थापित करने में कर पाएंगे। कुलगुरु ने प्रदर्शित विभिन्न उत्पादों की सराहना की तथा विद्यार्थियों से उनके निर्माण की बारीकियों व तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी ली।


तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए मिले उचित प्लेटफॉर्म: कुलसचिव
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. देवाराम सैनी ने भी छात्रों की रचनात्मकता की जमकर सराहना की। उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन को सुझाव दिया कि इन होनहार विद्यार्थियों द्वारा तैयार उत्पादों की व्यावसायिक बिक्री के लिए कॉलेज स्तर पर एक परमानेंट प्लेटफॉर्म या आउटलेट उपलब्ध करवाया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को आर्थिक संबल मिले और उनका उत्साहवर्धन हो सके।
सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. वीर सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि इस प्रदर्शनी में महाविद्यालय के तीन मुख्य विभागों— प्रसार शिक्षा एवं संचार प्रबंधन, परिधान एवं वस्त्र विज्ञान तथा खाद्य एवं पोषण विभाग की अनुभवात्मक अधिगम इकाई (ई.एल.यू.) के छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है।
जानिए क्या है ई.एल.यू. (Experiential Learning Unit)?
अधिष्ठाता डॉ. वीर सिंह ने बताया कि ई.एल.यू. (ELU), सामुदायिक विज्ञान डिग्री कार्यक्रम के अंतिम सेमेस्टर में संचालित होने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यावहारिक इकाई है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर किताबी ज्ञान से परे जाकर उद्यमिता विकास (Entrepreneurship), कौशल संवर्धन तथा बाजार के अनुसार विपणन प्रबंधन (Marketing Management) की व्यावहारिक समझ विकसित करना है ताकि वे पास आउट होते ही अपना स्टार्टअप शुरू कर सकें।
विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों का हुनर और नवाचार:
प्रदर्शनी में कॉलेज के अलग-अलग विंग्स के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया:
प्रसार शिक्षा विभाग (Extension Education): डॉ. प्रसन्नलता आर्य के कुशल निर्देशन में विद्यार्थियों ने कंप्यूटर आधारित आधुनिक शैक्षणिक सामग्री एवं रचनात्मक उत्पाद तैयार किए। इनमें आकर्षक पुस्तिकाएं, फोल्डर, लीफलेट के साथ-साथ ट्रेंडी एक्रेलिक कलर कोस्टर सेट, फ्रिज मैग्नेट, बुकमार्क्स तथा सुंदर फोन कवर मुख्य आकर्षण रहे।
खाद्य एवं पोषण विभाग (Food & Nutrition): डॉ. ममता सिंह के निर्देशन में छात्राओं ने अपनी पाक कला और पोषण विज्ञान का प्रदर्शन करते हुए शुद्ध व पौष्टिक खाद्य उत्पाद तैयार किए। इनमें घर के बने पापड़, विभिन्न प्रकार के स्क्वैश, पारंपरिक अचार, शुद्ध मसाले और चटपटी चटनी शामिल रहीं।
परिधान एवं वस्त्र विज्ञान विभाग (Textile & Apparel Designing): चांदनी स्वामी के निर्देशन में विद्यार्थियों ने अपने हाथ से बुने और डिजाइन किए परिधानों का प्रदर्शन किया। इनमें कशीदाकारी (Embroideries), बांधनी (Tie & Dye) और हाथ की चित्रकारी (Hand Painting) से सजी साड़ियां, स्टॉल, डिजाइनर बैग, मेकअप पाउच, की-चेन, कोस्टर सेट और कलात्मक डायरियां प्रदर्शित की गईं।
वरिष्ठ शिक्षाविदों व वैज्ञानिकों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. एन. के. शर्मा, निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. दीपाली धवन, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. विजय प्रकाश, डॉ. आर. एस. यादव, सीईओ डॉ. वी. एस. आचार्य, डॉ. राजेश वर्मा, डॉ. नीना सरीन, डॉ. सीमा त्यागी, डॉ. मंजू राठौड़ सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक और संकाय सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों के इस रचनात्मक और उद्यमी प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की।


