रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती पर विशेष गोष्ठी: ‘मातृभाषा एवं बाल साहित्य’ के महत्व पर हुई चर्चा

रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती पर विशेष गोष्ठी
STBA 5 JUNE 2026
quicjZaps 15 sept 2025
खमत खामणा
मुख्यमंत्री का स्वागत देशनोक आने पर

बीकानेर,07 मई। साहित्यिक संस्था ‘प्रज्ञालय संस्थान’ की ओर से विश्वविख्यात विद्वान और नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर गुरुवार को एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन’ में आयोजित इस गोष्ठी का मुख्य विषय ‘मातृभाषा एवं बाल साहित्य’ रहा।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

मातृभाषा में बाल साहित्य की सार्थकता
गोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ राजस्थानी साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि बाल साहित्य का सृजन करना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने टैगोर का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने अपनी मातृभाषा बांग्ला में ‘काबुलीवाला’, ‘बादल और लहरें’ जैसी कालजयी रचनाएँ लिखीं, जो बाद में विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनूदित होकर पूरे देश में लोकप्रिय हुईं। रंगा ने जोर दिया कि जब बाल साहित्य बच्चे की अपनी मातृभाषा में होता है, तो उसकी प्रभावशीलता और सार्थकता कई गुना बढ़ जाती है।

pop ronak

मनोविज्ञान और अभिरुचि पर जोर
चर्चा के दौरान यह बात उभरकर आई कि बाल साहित्य बालकों के मनोविज्ञान और उनकी अभिरुचि के अनुरूप होना चाहिए। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शिक्षाविद् राजेश रंगा ने गिरती पठन प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पुस्तकें बालक की सच्ची मित्र होती हैं, जो उनकी कल्पनाशीलता और भावनाओं को संबल प्रदान करती हैं।

मातृभाषा के प्रति सजगता
करूणा क्लब के हरिनारायण आचार्य ने बालकों से अपनी मातृभाषा को जीवन व्यवहार में लाने का आह्वान किया। गोष्ठी में हेमलता व्यास, नवनीत व्यास, कन्हैयालाल पंवार और राहुल सहित कई प्रबुद्ध जनों ने भी अपने विचार रखे और बाल साहित्य के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का संचालन आशीष रंगा ने किया, जबकि अंत में भवानी सिंह राठौड़ ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।