नाबालिग से गैंगरेप के दो दोषियों को ‘ताउम्र जेल’ की सजा
नाबालिग से गैंगरेप के दो दोषियों को 'ताउम्र जेल' की सजा


- बीकानेर पॉक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
बीकानेर,11 मई। बीकानेर के एक बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपराधियों को उनके ‘शेष प्राकृतिक जीवनकाल’ तक सलाखों के पीछे रहने का आदेश दिया है। विशेष पॉक्सो (POCSO) न्यायालय की न्यायाधीश डॉ. मनीषा चौधरी ने सोमवार को इस मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया।


दोषियों को नहीं मिलेगी रिहाई, उम्रकैद के साथ भारी जुर्माना
अदालत ने अभियुक्त सुभाष और धर्माराम उर्फ धर्मपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया। सजा का विवरण इस प्रकार है:


शेष जीवन तक कारावास: दोनों दोषियों को धारा 376-DA के तहत अब अपनी पूरी जिंदगी जेल में काटनी होगी।
आर्थिक दंड: दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अन्य अपराध: दोषियों को घर में जबरन घुसने (धारा 447) और मारपीट (धारा 323) के लिए भी अलग-अलग कारावास की सजा सुनाई गई है।
गवाहों और साक्ष्यों ने किया अपराध पुख्ता
विशिष्ट लोक अभियोजक शिवचंद भोजक ने न्यायालय के समक्ष 15 गवाहों के बयान और 23 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। इन मजबूत सबूतों के आधार पर अदालत ने माना कि सुभाष ने नाबालिग के साथ बलात्कार किया और धर्माराम ने इस जघन्य अपराध में न केवल सहयोग किया, बल्कि पीड़िता और उसके परिजनों के साथ मारपीट भी की।
पीड़िता के पुनर्वास के लिए 4 लाख का मुआवजा
न्यायालय ने पीड़िता के भविष्य और मानसिक आघात को ध्यान में रखते हुए राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना-2011 के तहत 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की अनुशंसा की है। यह राशि सीधे पीड़िता के बैंक खाते में जमा की जाएगी। यदि पहले कोई अंतरिम सहायता दी गई है, तो उसे इसमें समायोजित किया जाएगा।
न्यायालय की सख्त टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि नाबालिग पीड़िता के पुनर्वास और उसके भविष्य को देखते हुए केवल अपराधियों को दंडित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे उचित मुआवजा मिलना भी न्याय का हिस्सा है। अदालत ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के नजीरों और पॉक्सो एक्ट के कड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए समाज में कड़ा संदेश देने का प्रयास किया है।


