उद्धव ठाकरे की अहम बैठक से 23 विधायक गायब; गठबंधन की एकजुटता पर उठे सवाल
उद्धव ठाकरे की अहम बैठक से 23 विधायक गायब; गठबंधन की एकजुटता पर उठे सवाल



- महाराष्ट्र में बड़े सियासी भूचाल के संकेत
मुंबई, 26 जून । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भारी उथल-पुथल और बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। आगामी मानसून सत्र के मद्देनजर रणनीति तय करने के लिए महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन द्वारा बुलाई गई एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक बैठक से 60 में से 23 विधायकों ने दूरी बना ली। हाल ही में उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना UBT) के 6 लोकसभा सांसदों के पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में शामिल होने के बाद, इतनी बड़ी संख्या में विधायकों और कद्दावर नेताओं की इस अनुपस्थिति ने अघाड़ी गठबंधन के भविष्य और उसकी आंतरिक एकजुटता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।


इस हाई-प्रोफाइल बैठक में केवल विधायकों की ही कमी नहीं खली, बल्कि गठबंधन के सबसे शीर्ष और मार्गदर्शक चेहरे भी नदारद रहे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP – शरद चंद्र पवार) के सुप्रीमो शरद पवार और उनके वरिष्ठ सहयोगी जयंत पाटिल इस बैठक में शामिल नहीं हुए, जिसके लिए उनके करीबियों द्वारा निजी कारणों का हवाला दिया गया। इसके अलावा, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार भी इस अहम मंथन से गायब रहे। दिग्गज नेताओं की इस बेरुखी ने राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा को तेज कर दिया है कि अघाड़ी कुनबे के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।


सांसदों की बगावत के बाद छलका उद्धव का दर्द, पूछा— क्या हम वाकई एक साथ हैं?
लोकसभा सांसदों की हालिया बगावत का दंश झेल रहे शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बैठक के दौरान अपनी गहरी हताशा, नाराजगी और राजनीतिक दर्द को खुलकर जाहिर किया। उन्होंने गठबंधन सहयोगियों की निष्ठा और एकजुटता पर सीधा सवाल दागते हुए पूछा, “हम केवल मंचों से और बयानों में कहते हैं कि हम एक साथ हैं… लेकिन क्या हम वास्तव में सदन के भीतर महा विकास अघाड़ी के रूप में एकजुट दिखाई देते हैं? क्या हम सब मिलकर जनता के असल मुद्दों को सदन पटल पर मजबूती से उठाते हैं?”
“जो चले गए… उन्हें जाने दें”, अब बचे हुए कुनबे को समेटने की कवायद
बागी सांसदों के जाने से आहत उद्धव ठाकरे ने भावुक लेकिन कड़े लहजे में सहयोगियों से अपील की कि अब समय उन लोगों पर अपनी पूरी ऊर्जा और ध्यान केंद्रित करने का है, जो आज भी तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारे साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो पार्टी और विचारधारा छोड़कर चले गए हैं, उन्हें जाने दें, हमें उनके पीछे अपना कीमती वक्त और राजनीति बर्बाद करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बहरहाल, राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों और ठीक पहले शुरू हो रहे मानसून सत्र से पहले महा विकास अघाड़ी के भीतर की यह गहरी दरार महाराष्ट्र की राजनीति को किस नए मोड़ पर ले जाती है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।


