शांतिनिकेतन सेवा केंद्र में सेवा का नया अध्याय प्रारम्भ , साध्वी त्रिशला कुमारी जी ने संभाला व्यवस्थापिका का दायित्व

शांतिनिकेतन सेवा केंद्र में सेवा का नया अध्याय प्रारम्भ
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  • सेवा से कर्मों की निर्जरा, गंगाशहर में साध्वी श्री विशदप्रज्ञा जी का विदाई

बीकानेर \ गंगाशहर , 4 मार्च। बीकानेर के गंगाशहर स्थित शांतिनिकेतन सेवा केंद्र में बुधवार को एक गरिमामय ‘सेवा हस्तांतरण समारोह’ का आयोजन किया गया। आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी (ठाणा 8) ने विधिवत रूप से सेवा केंद्र व्यवस्थापिका के रूप में अपना नया दायित्व ग्रहण किया। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में धर्म संघ की वृद्ध साध्वियों की सेवा को ईश्वरीय कार्य बताते हुए आध्यात्मिक हर्ष व्यक्त किया गया।
शान्तिनिकेतन सेवा केन्द्र तेरापंथ धर्म संघ के वृद्ध अवस्था प्राप्त साध्वियों का केन्द्र है। उन सभी साध्वियों की सेवा के लिए आचार्य श्री प्रतिवर्ष साध्वियों के समूह को भेजते हैं।

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नवनियुक्त व्यवस्थापिका साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी ने प्रातः 8:15 बजे आचार्य श्री तुलसी समाधि स्थल से विहार कर सेवा केंद्र में प्रवेश किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “सेवा कर्म निर्जरा का सबसे महत्वपूर्ण साधन है, जिससे संचित कर्मों का क्षय और तीर्थंकर नामकर्म का अर्जन संभव है।” उन्होंने तेरापंथ धर्म संघ को सेवा, समर्पण और सौहार्द की एक अनुपम मिसाल बताया, जहाँ गुरु दर्शन से भी ऊपर सेवा के दायित्व को रखा जाता है।

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इससे पूर्व, एक वर्ष का सफल सेवा कार्यकाल पूर्ण करने वाली साध्वी श्री विशदप्रज्ञा जी एवं साध्वी श्री लब्धियशा जी का विदाई और मंगल भावना समारोह मनाया गया। साध्वी श्री विशदप्रज्ञा जी ने भारतीय संस्कृति में सेवा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे मुक्ति का मार्ग बताया। वहीं, साध्वी श्री लब्धियशा जी ने होली के पर्व पर सेवा केंद्र में छाई खुशियों की तुलना दीपावली से करते हुए कहा कि साध्वी त्रिशला कुमारी जी द्वारा गुरु सन्निधि को छोड़कर सेवा के कठिन दायित्व को चुनना उनकी गहरी संघ निष्ठा का परिचायक है।

समारोह के दौरान साध्वियों ने रोचक संवाद और गीतिकाओं के माध्यम से चाकरी व्यवस्था एवं सेवाग्राही साध्वियों का परिचय प्रस्तुत किया। साध्वी श्री मल्लिकाश्री जी ने अपने भावपूर्ण विचार व्यक्त किये। इस विशेष अवसर पर जैन लूणकरण छाजेड़, अमरचंद सोनी, जतनलाल संचेती और रतनलाल छल्लाणी सहित अनेक गणमान्य श्रावकों ने साध्वी श्री जी का स्वागत किया और उनके सफल कार्यकाल की मंगल कामना की। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती मंजु आंचलिया द्वारा किया गया।

 

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