विधानसभा उपचुनाव 2026- भाजपा के मुकाबले विपक्षी दलों की बिसात
विधानसभा उपचुनाव 2026- भाजपा के मुकाबले विपक्षी दलों की बिसात


9 अप्रैल को होगा मतदान, cVIGIL’ ऐप से निष्पक्षता की गारंटी


नई दिल्ली/बीकानेर, 19 मार्च । चुनाव आयोग ने छह राज्यों की 8 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. इन सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा. गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र की सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा.


आगामी विधानसभा उपचुनावों के लिए 6 राज्यों की 8 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए भाजपा द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब विपक्षी खेमे में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस और विभिन्न क्षेत्रीय दलों ने भाजपा के ‘मिशन 5-0’ को रोकने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। इस बीच, निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को ‘डिजिटल प्रहरी’ बनाने के लिए ‘cVIGIL’ ऐप को और अधिक सशक्त किया है।
#WATCH दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, "गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और त्रिपुरा की 8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे। शेड्यूल यह होगा कि गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा के विधानसभा क्षेत्रों के लिए 9 अप्रैल को और गुजरात और महाराष्ट्र के… pic.twitter.com/kKHO4pgT6v
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 15, 2026
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी विधानसभा उपचुनावों के लिए अपनी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) ने बुधवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद गोवा, नागालैंड, कर्नाटक और त्रिपुरा की कुल पांच विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में हुई इस बैठक में चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों की योग्यता पर विस्तार से चर्चा की गई।
भाजपा उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची
पार्टी द्वारा जारी सूची के अनुसार, विभिन्न राज्यों में निम्नलिखित चेहरों पर दांव लगाया गया है। भाजपा ने गोवा की पोंडा विधानसभा सीट से रितेश रवि नायक को उम्मीदवार बनाया है। नागालैंड की कोरिडांग (आरक्षित) विधानसभा सीट से दाओचियर आई इम्चेन को टिकट दिया है। इसी तरह कर्नाटक के बागलकोट विधानसभा से वीरभद्रय्या चरंतीमठ और दावणगेरे दक्षिण से श्रीनिवास टी. दासकरियप्पा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, त्रिपुरा की धर्मनगर विधानसभा सीट से जहर चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया है।
विपक्षी दलों की घेराबंदी: गठबंधन और स्थानीय चेहरे
भाजपा उम्मीदवारों के मुकाबले विपक्षी दलों ने भी अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं।
कर्नाटक (बागलकोट व दावणगेरे दक्षिण): यहाँ मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है। कांग्रेस ने स्थानीय दिग्गजों के परिजनों और युवा चेहरों पर दांव लगाने के संकेत दिए हैं। बागलकोट सीट, जो कांग्रेस के एच.वाई. मेटी के निधन से खाली हुई थी, उसे वापस पाना कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है।
त्रिपुरा (धर्मनगर): यहाँ जहर चक्रवर्ती (BJP) को सीपीएम (CPIM) और कांग्रेस के संयुक्त गठबंधन से कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है।
नागालैंड (कोरिडांग): इस आरक्षित सीट पर क्षेत्रीय दलों (जैसे NDPP या स्वतंत्र उम्मीदवार) का दबदबा रहा है, जहाँ भाजपा को अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।
गुजरात की उमरेठ सीट पर उपचुनाव
गुजरात की उमरेठ विधानसभा सीट पर 23 अप्रैल को मतदान होगा. यह सीट बीजेपी विधायक गोविंदभाई परमार के निधन के बाद खाली हुई है.
महाराष्ट्र की बारामती और राहुरी सीट पर उपचुनाव
महाराष्ट्र में बारामती और राहुरी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं. इन दोनों सीटों पर 23 अप्रैल को दूसरे चरण में मतदान होगा. बारामती सीट को लेकर राजनीतिक हलकों में खास चर्चा है. यह सीट दिवंगत एनसीपी नेता अजित पवार की रही है, और माना जा रहा है कि यहां से उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार चुनाव मैदान में उतर सकती हैं. वहीं, अहिल्यानगर (पूर्व नाम-अहमदनगर) जिले की राहुरी विधानसभा सीट शिवाजी कर्डीले के निधन के बाद खाली हुई है.
गोवा की पोंडा सीट पर पहले चरण में मतदान
गोवा की पोंडा विधानसभा सीट पर 9 अप्रैल को पहले चरण में वोटिंग होगी. यह सीट बीजेपी नेता रवि नाइक के निधन के बाद रिक्त हुई है. रवि नाइक गोवा के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके थे. उन्होंने 2022 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन की थी। पोंडा सीट पर रितेश रवि नायक (BJP) के सामने ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन एक साझा उम्मीदवार उतारने की कोशिश में है, ताकि मतों का बिखराव रोका जा सके।
कर्नाटक में बागलकोट और दक्षिण दावणगेरे में होंगे उपचुनाव
कर्नाटक में बागलकोट और दक्षिण दावणगेरे विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को उपचुनाव कराए जाएंगे. चुनाव आयोग के अनुसार, बागलकोट सीट कांग्रेस विधायक एच.वाई. मेटी के निधन के बाद खाली हुई है. वहीं, दक्षिण दावणगेरे सीट शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण रिक्त हुई है.
नगालैंड के कोरिडांग और त्रिपुरा के धर्मनगर में उपचुनाव
नागालैंड के कोरिडांग और त्रिपुरा के धर्मनगर विधानसभा क्षेत्रों में 9 अप्रैल को उपचुनाव कराए जाएंगे. धर्मनगर विधानसभा सीट त्रिपुरा विधानसभा के अध्यक्ष और वरिष्ठ विधायक विश्व बंधु सेन के निधन के बाद खाली हुई है. वहीं, नागालैंड के कोरिडांग विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव वरिष्ठ नागा नेता इम्कोंग एल इमचेन के निधन के कारण कराया जा रहा है।
cVIGIL ऐप: 100 मिनट में समाधान की गारंटी
निर्वाचन आयोग ने ‘निष्पक्ष चुनाव’ के अपने वादे को निभाने के लिए cVIGIL (Vigilant Citizen) ऐप को अपडेट किया है। यह ऐप आम नागरिकों को ‘चुनाव पर्यवेक्षक’ की शक्ति देता है।
लाइव रिपोर्टिंग: यदि कोई उम्मीदवार या दल शराब बांटने, पैसे का लालच देने या बिना अनुमति लाउडस्पीकर बजाने (आचार संहिता उल्लंघन) जैसी गतिविधि करता है, तो नागरिक उसका लाइव फोटो या 2 मिनट का वीडियो ऐप पर अपलोड कर सकते हैं।
ऑटो लोकेशन: ऐप जीपीएस (GPS) के माध्यम से घटना स्थल की सटीक जानकारी स्वतः ही कंट्रोल रूम को भेज देता है।
100 मिनट का डेडलाइन: शिकायत दर्ज होने के बाद 100 मिनट के भीतर फ्लाइंग स्क्वाड को मौके पर पहुँचकर कार्रवाई करनी होती है और स्टेटस अपडेट करना होता है।
गोपनीयता: शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है। ध्यान रहे क
इस ऐप पर पुरानी गैलरी से फोटो या वीडियो अपलोड नहीं किए जा सकते, केवल ‘लाइव’ रिपोर्टिंग ही संभव है।
चुनावी कार्यक्रम: कब और कहाँ होगी वोटिंग?
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, इन उपचुनावों के लिए मतदान की प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न होगी:
प्रथम चरण (9 अप्रैल): गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा की उपरोक्त सीटों पर मतदान होगा।
द्वितीय चरण (23 अप्रैल): गुजरात और महाराष्ट्र की चिन्हित सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
परिणाम (4 मई): सभी सीटों पर मतगणना एक साथ 4 मई को होगी।
चुनाव आयोग की पैनी नजर: 1,111 पर्यवेक्षक तैनात
स्वच्छ और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कड़े कदम उठाए हैं। आयोग ने पांच राज्यों (असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल) के आम चुनावों और छह राज्यों के उपचुनावों के लिए कुल 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पर्यवेक्षकों की भूमिका चुनाव-हिंसा रोकने और प्रलोभन मुक्त मतदान सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होगी। पर्यवेक्षकों को 18 मार्च तक अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंचने के निर्देश दिए गए थे, ताकि वे उम्मीदवारों और जनता की शिकायतों का मौके पर ही निपटारा कर सकें।

