प्राचीन जिनालयों में लहराई धर्म ध्वजा, भक्ति और तपस्या के साथ मनाया गया भगवान महावीर कल्याणक

प्राचीन जिनालयों में लहराई धर्म ध्वजा, भक्ति और तपस्या के साथ मनाया गया भगवान महावीर कल्याणक
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 31 मार्च 2026। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव मंगलवार को बीकानेर में अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के प्राचीन और ऐतिहासिक जिनालयों में सुबह से ही श्रावक-श्राविकाओं का तांता लगा रहा। भक्ति संगीत, विशेष पूजा-अर्चना और शिखरों पर नवीन ध्वजारोहण के साथ समूचा शहर ‘त्रिशला नंदन’ के जयकारों से गुंजायमान रहा।

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600 वर्ष प्राचीन बैदों के महावीर मंदिर में भव्य अनुष्ठान
बैदों के चौक स्थित छह शताब्दी से अधिक प्राचीन श्री जैन श्वेताम्बर महावीर स्वामी मंदिर में विशेष आयोजन हुए। ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेन्द्र बैद, सचिव भूपेन्द्र बैद और कोषाध्यक्ष विजय वैद के नेतृत्व में सकल श्री संघ के सहयोग से विविध धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं।

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अंगी और रंगोली: मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की बालुई पत्थर से निर्मित स्वर्ण लेपित प्रतिमा की भव्य चांदी की अंगी रचना की गई।

ध्वजारोहण: अहमदाबाद से विशेष रूप से मंगवाई गई नवीन ध्वजाओं को नवकार महामंत्र के उच्चारण के साथ मंदिर के पांचों शिखरों पर स्थापित किया गया।

धार्मिक कार्यक्रम: सुबह सामूहिक भक्तामर पाठ, शांति स्नात्र और शांति कलश के बाद दोपहर में ‘पंच कल्याणक पूजा’ की गई। शाम को 108 दीपकों से महाआरती और भजन संध्या का आयोजन हुआ।

विभिन्न जिनालयों में भक्ति का संगम

शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी महोत्सव की रौनक देखते ही बनी

चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास: रांगड़ी चौक स्थित बोहरों की सेहरी के प्राचीन मंदिर में प्रन्यास अध्यक्ष हरीश नाहटा और कोषाध्यक्ष फतेहचंद खजांची की मौजूदगी में ध्वजा परिवर्तन और पूजा की गई।

आसानियों का चौक: यहाँ स्थित महावीर स्वामी मंदिर में दिनभर नवकार जाप चला और शाम को 108 दीपकों की आरती के साथ दीपमालिका सजाई गई।

दिगंबर जैन समाज: नसियाजी और मथैरणों के चौक स्थित बड़ा मंदिर में विशेष दर्शन-वंदन हुए। नसियाजी में 35 श्राविकाओं ने एक समान साड़ी पहनकर भक्ति गीत प्रस्तुत किए और ‘अहिंसा यात्रा’ में उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

अन्य क्षेत्र: गंगाशहर के गोल मंदिर और डागा मोहल्ला स्थित जिनालयों में भी श्रद्धालुओं ने केसर पूजा और प्रक्षाल के साथ भगवान के दर्शन किए।

तपस्या और त्याग का संदेश
महोत्सव के अवसर पर बड़ी संख्या में समाज बंधुओं ने अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर स्वैच्छिक अवकाश रखा। अहिंसा और संयम के मार्ग पर चलते हुए अनेक श्रावकों ने उपवास और एकासना जैसी कठिन तपस्याएं कीं। मंदिरों में सामूहिक नवकार महामंत्र के जाप के माध्यम से विश्व शांति की कामना की गई।