केवीके बीकानेर में उर्वरक विक्रेताओं के लिए 15 दिवसीय प्रशिक्षण प्रारंभ
केवीके बीकानेर में उर्वरक विक्रेताओं के लिए 15 दिवसीय प्रशिक्षण प्रारंभ


- वैज्ञानिकों ने कहा- विक्रेता हैं किसानों और वैज्ञानिकों के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी
बीकानेर, 5 मई। उर्वरक विक्रेताओं को आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक जानकारी से लैस करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बीकानेर में मंगलवार से 15 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम के माध्यम से उर्वरक विक्रेताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे किसानों को सही परामर्श देकर कृषि उत्पादन बढ़ाने में सहयोगी बन सकें।


संतुलित उर्वरक और उन्नत बीज पर जोर
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि कुलगुरु डॉ. आर.बी. दुबे ने उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बिना सोचे-समझे उर्वरकों का उपयोग मृदा (मिट्टी) की उर्वरता को नष्ट कर रहा है। उन्होंने विक्रेताओं से अपील की कि वे किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरक उपयोग करने के लिए प्रेरित करें। साथ ही, उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज को अच्छी फसल की नींव बताते हुए उन्नत किस्मों के चयन पर जोर दिया।


विक्रेता: विस्तार तंत्र की अहम कड़ी
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. दीपाली धवन ने कहा कि उर्वरक विक्रेता केवल व्यापारी नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच एक सेतु हैं। यदि विक्रेताओं को नई तकनीकों और वैज्ञानिक सूचनाओं की सही जानकारी होगी, तो वे किसानों को सही समय पर सटीक सलाह दे पाएंगे।
प्रशिक्षण की रूपरेखा और मुख्य विषय
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मदन लाल रेगर ने बताया कि इस 15 दिवसीय सत्र में प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण विषयों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा:
मृदा एवं पोषक तत्व: मृदा परीक्षण की विधियां, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के सुधार के उपाय।
प्रबंधन: उर्वरकों का सुरक्षित भंडारण, गुणवत्ता नियंत्रण और जैव उर्वरकों का उपयोग।
तकनीकी सत्र: कीट एवं रोग प्रबंधन और बागवानी फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन।
विषय विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
प्रशिक्षण के दौरान सहायक आचार्य डॉ. सुशील कुमार ने बागवानी, डॉ. एम.के. जाटव (CIAH) ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और डॉ. बनवारी लाल (IIPR) ने दलहनी फसलों में उर्वरक प्रबंधन व जैव उर्वरकों के महत्व पर विस्तृत जानकारी साझा की।

