राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (NRCC) बीकानेर में वार्षिक आईआरसी बैठक संपन्न; ‘कैमल लैक्टोफेरिन’ जैसे गुणों पर वैश्विक शोध की जरूरत

राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (NRCC) बीकानेर में वार्षिक आईआरसी बैठक संपन्न; 'कैमल लैक्टोफेरिन' जैसे गुणों पर वैश्विक शोध की जरूरत
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 19 मई। भा.कृ.अनु.प.-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (NRCC), बीकानेर की संस्थान अनुसंधान परिषद (IRC) की वार्षिक बैठक का आयोजन किया गया। पूरे दिन चली इस उच्च स्तरीय बैठक में केन्द्र की विभिन्न चालू व आगामी अनुसंधान परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों एवं वैज्ञानिक गतिविधियों की गहन समीक्षा की गई। बैठक में वैज्ञानिकों द्वारा ऊँटों के संरक्षण, संवर्धन और उष्ट्र उत्पादों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर किए जा रहे शोध कार्यों पर विस्तार से विमर्श हुआ।

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बैठक में मुख्य विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जय कुमार कौशिक ने अपने संबोधन में कहा कि वैज्ञानिक प्रगति के लिए सकारात्मक आलोचना, खुला विमर्श और वैश्विक नवाचारों को अपनाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने मूलभूत एवं व्यावहारिक अनुसंधान दोनों को समान रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए ऊँट के दूध में मौजूद ‘कैमल लैक्टोफेरिन’ जैसे अनूठे जैव-सक्रिय (बायो-एक्टिव) गुणों पर शोध की वैश्विक संभावनाओं को रेखांकित किया। देश में ऊँटों की घटती संख्या और बदलते परिदृश्य का हवाला देते हुए उन्होंने उष्ट्र पालन की समसामयिक चुनौतियों से निपटने हेतु उपभोक्ता-केंद्रित व नवीन अनुसंधान पर विशेष बल दिया। इसके साथ ही, डॉ. कौशिक ने ऊँट पालकों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए एनआरसीसी द्वारा किए जा रहे जमीनी प्रयासों की भूरि-भूरि सराहना की।

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केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों और वर्तमान गतिविधियों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि केंद्र के वैज्ञानिक ऊँटों से जुड़े विविध और अनछुए पहलुओं पर महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बैठक में केंद्र द्वारा विकसित किए गए नए नवाचारों को रेखांकित किया और विश्वास दिलाया कि विशेषज्ञों द्वारा दिए गए मूल्यवान सुझावों व मार्गदर्शन को अनुसंधान कार्यों में समाहित किया जाएगा, जिससे चालू परियोजनाओं की गुणवत्ता और उपयोगिता और अधिक सुदृढ़ हो सके। डॉ. पूनिया ने भविष्य में अपेक्षित परिणामों की प्राप्ति के लिए विशेषज्ञों से निरंतर मार्गदर्शन की अपेक्षा जताई। इससे पूर्व, केन्द्र के सदस्य सचिव (IRC) डॉ. राकेश रंजन द्वारा आईआरसी की पिछली बैठक के निर्णयों संबंधी प्रतिवेदन सदन के सम्मुख प्रस्तुत किया गया। बैठक की कार्यवाही के दौरान सभी वैज्ञानिकों ने बारी-बारी से अपनी परियोजनाओं में गत वर्ष के दौरान हासिल की गई सफलताओं एवं भविष्य के अनुसंधान परीक्षणों का विवरण प्रस्तुत किया।

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