सुभाष जोशी और दिनेश चुरा को अमेरिका के विश्वविद्यालय से पीएचडी की मानद उपाधि
सुभाष जोशी और दिनेश चुरा को अमेरिका के विश्वविद्यालय से पीएचडी की मानद उपाधि


बीकानेर, 30 मई । शिक्षा और प्रशासनिक कौशल के क्षेत्र में अपनी पहचान रखने वाले बीकानेर के दो होनहारों ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर जिले का नाम रोशन किया है। यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका (USA) के सीडर ब्रुक विश्वविद्यालय द्वारा बीकानेर के शिक्षाविद् सुभाष जोशी और वरिष्ठ लेखा कर्मी दिनेश चुरा को पीएचडी (Ph.D.) की मानद उपाधि से नवाजा गया है।


शिक्षा और लेखा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान
अखिल भारतीय पुष्टिकर सेवा परिषद (युवा) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. जी. बिस्सा ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि बीकानेर के दोनों महानुभावों को उनके संबंधित क्षेत्रों में किए गए कार्यों के आधार पर इस मानद उपाधि के लिए चुना गया.


सुभाष जोशी: वर्तमान में ‘पीएम श्री’ राजकीय सादुल उच्च माध्यमिक विद्यालय में वरिष्ठ अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में शैक्षणिक उत्थान के लिए यह उपाधि दी गई है।
दिनेश चुरा: वर्तमान में स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) में कोषाधिकारी (Treasury Officer) के महत्वपूर्ण पद पर सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें लेखा सेवा के क्षेत्र में उनके कार्यों के लिए इस मानद उपाधि से अलंकृत किया गया है।
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में दी गई उपाधि
बिस्सा ने बताया कि शनिवार, 30 मई को नई दिल्ली के मेपल गोल्ड बैंक्वेट्स (रेडिसन ब्लू होटल) में विश्वविद्यालय द्वारा एक दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया था। इसी समारोह में मुख्य मंच पर जोशी और चुरा को यह मानद उपाधि विधिवत रूप से सुपुर्द की गई।
इस अंतरराष्ट्रीय दीक्षांत समारोह में सीडर ब्रुक विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ-साथ भारत और विदेश की कई हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में पूर्व सांसद दीप सिंह राठौड़, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के उपनिदेशक रघुवीर शर्मा, सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. प्रभात कुमार तथा नेपाल से विशेष रूप से पधारे विश्व गुरु डॉ. गौरी शंकर महाराज की गरिमामयी उपस्थिति रही। इन सभी गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में बीकानेर की दोनों व्यक्तियों को इस मानद उपाधि से विभूषित किया गया। दिनेश चुरा और सुभाष जोशी ने कठिन परिश्रम के बल पर अपने-अपने कार्यक्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसका परिणाम आज इस मानद उपाधि के रूप में सामने आया है।



