राजस्थान विधिक माप विज्ञान नियमों में संशोधन का प्रस्ताव; हितधारकों से 7 दिन में मांगे सुझाव और आपत्तियां

राजस्थान विधिक माप विज्ञान नियमों में संशोधन का प्रस्ताव; हितधारकों से 7 दिन में मांगे सुझाव और आपत्तियां
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बीकानेर, 21 जून। राज्य सरकार ने राजस्थान विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियम, 2011 में एक बड़े नीतिगत संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन भारत सरकार की डी-रेगुलेशन एवं कंप्लायंस बर्डन रिडक्शन पहल तथा जन विश्वास अधिनियम, 2026 के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किए गए हैं। इस बड़े कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य में व्यवसाय सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ाना, व्यापारियों पर अनुपालन भार को कम करना और नियामकीय प्रक्रियाओं को अधिक सरल व पारदर्शी बनाना है।

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प्रस्तावित संशोधनों के तहत उद्योगों और व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए निर्माताओं, मरम्मतकर्मियों और विक्रेताओं के लिए वर्तमान में लागू जटिल लाइसेंस व्यवस्था के स्थान पर अब स्व-घोषणा (सेल्फ-डिक्लेरेशन) आधारित पंजीकरण प्रमाण-पत्र की नई व्यवस्था लागू करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, अब लाइसेंस नवीनीकरण (रिन्यूअल) की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त करने, सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (GATCs) को सत्यापन एवं मुद्रांकन प्रक्रिया में शामिल करने, सत्यापन शुल्क का युक्तिसंगत पुनर्निर्धारण करने तथा विभिन्न श्रेणी के उल्लंघनकर्ताओं के लिए अनुपातिक शमन शुल्क (कॉम्पाउंडिंग फीस) निर्धारित करने जैसे कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक प्रावधान प्रस्तावित हैं।

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राज्य सरकार ने इन प्रस्तावित नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सभी हितधारकों, व्यापारिक संगठनों, उद्योग संघों, उपभोक्ता संगठनों और आमजन से उनके अमूल्य सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। कोई भी इच्छुक व्यक्ति अथवा संस्था राजस्थान राजपत्र (गजट) में इसके प्रकाशन की तिथि से सात दिवस के भीतर अपने सुझाव या आपत्तियां आधिकारिक ई-मेल dclm.hq1@rajasthan.gov.in तथा secy-food-rj@nic.in पर प्रेषित कर सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा (7 दिन) समाप्त होने के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी सुझाव अथवा आपत्ति पर विचार किया जाना संभव नहीं होगा।

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