ऑपरेशन टाइगर विवाद के बीच उद्धव का शक्ति प्रदर्शन

ऑपरेशन टाइगर विवाद के बीच उद्धव का शक्ति प्रदर्शन
STBA 5 JUNE 2026
quicjZaps 15 sept 2025
  • शिवसेना सिर्फ एक ही हो सकती है; बागी सांसदों पर साधा निशाना

मुंबई, 22 जून। पार्टी सांसदों के लगातार पाला बदलने और अंदरूनी बगावत से उपजे सियासी संकट के बीच शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई में एक बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू कर अपना शक्ति प्रदर्शन किया है। उद्धव ठाकरे ने बागी नेताओं को कड़ा संदेश देते हुए दो टूक कहा कि शिवसेना का अस्तित्व सिर्फ एक ही रह सकता है, क्योंकि इस संगठन का मूल उद्देश्य मराठी मानुष के अधिकारों की रक्षा करना है। रविवार को कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ डटकर मुकाबला किया और जनता के आशीर्वाद से जीत दर्ज की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब कुछ सांसद सत्ता और पैसे की भूख में आकर न सिर्फ संगठन बल्कि आम जनता के भरोसे का भी खून कर रहे हैं। इस संकट के बीच उन्होंने मुंबई उत्तर-पूर्व लोकसभा क्षेत्र से अपने जनसंपर्क अभियान का शंखनाद कर दिया है, जिसका प्रतिनिधित्व दलबदल करने वाले सांसद संजय दिना पाटिल कर रहे हैं।

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बागी सांसदों के झटके से ठाकरे गुट पर गहराया संकट

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शिवसेना (यूबीटी) में मची इस अंदरूनी बगावत ने उद्धव ठाकरे के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी के छह असंतुष्ट सांसदों में से दो ने रविवार को आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के धड़े का दामन थाम लिया, जिससे बचे हुए चार अन्य सांसदों के भी पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर ने अपने पिता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में अदालत का फैसला आने के ठीक बाद पार्टी को अलविदा कह दिया, जबकि हिंगोली के सांसद नागेश अष्टीकर ने सोशल मीडिया लाइव के जरिए शिंदे गुट में जाने का एलान किया। शनिवार को कोर्ट द्वारा हत्याकांड के सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने ओमराजे को रोकने की आखिरी कोशिश की थी, जो नाकाम रही।

ऑपरेशन टाइगर’ के जरिए संगठन में बड़ी सेंधमारी की तैयारी

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद से ही एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना उद्धव गुट को कमजोर करने की सोची-समझी रणनीति पर काम कर रही थी। संसद में परिसीमन विधेयक पारित न होने के बाद इस योजना को ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम देकर तेजी से लागू किया गया। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे ने इस राजनीतिक हालात का फायदा उठाते हुए भाजपा आलाकमान को आश्वस्त किया कि वे विरोधी खेमे के सांसदों को अपने साथ जोड़कर गठबंधन की ताकत में इजाफा कर सकते हैं।

संसद के बाद अब देश की सबसे अमीर महानगरपालिका पर नजर

सांसदों को तोड़ने के बाद अब एकनाथ शिंदे गुट की नजर देश की सबसे अमीर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर टिक गई है, जहां बड़े पैमाने पर दलबदल कराने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शिंदे गुट का दावा है कि उद्धव खेमे के करीब 45 पूर्व पार्षद उनके सीधे संपर्क में हैं और जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। दलबदल विरोधी कानून की जद से बचने के लिए यह संख्या कुल पार्षदों का दो-तिहाई हिस्सा है, जो कि अयोग्यता की कार्रवाई से सुरक्षित रहने के लिए बेहद जरूरी है। शिंदे गुट के स्थानीय नेताओं का कहना है कि विपक्षी खेमा पहले सांसदों के जाने की खबरों को भी महज अफवाह बता रहा था, लेकिन आखिरकार जमीनी हकीकत सबके सामने आ चुकी है।

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