कृषि विश्वविद्यालय में 8 वर्ष बाद शिक्षकों को मिलेगा सीएएस का लाभ

कृषि विश्वविद्यालय में 8 वर्ष बाद शिक्षकों को मिलेगा सीएएस का लाभ
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quicjZaps 15 sept 2025
STBA 5 JUNE 2026
  • 57 शैक्षणिक कार्मिकों की पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू

बीकानेर, 22 जून । स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के टीचिंग स्टाफ (शैक्षणिक स्टाफ) के लिए एक राहत भरी खबर है। विश्वविद्यालय में करीब 8 साल के लंबे अंतराल के बाद ‘करियर एडवांसमेंट स्कीम’ (CAS) के तहत शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है। अशैक्षणिक कार्मिकों को पदोन्नति का लाभ देने के बाद अब कुलगुरु डॉ. आर.बी. दुबे के प्रयासों से शैक्षणिक कार्मिकों की पदोन्नति के लिए राज्य सरकार को अनुमति हेतु प्रस्ताव भेजा गया है। विश्वविद्यालय के कई शिक्षक तो वर्ष 2020 से ही इस पदोन्नति की योग्यता रख रहे थे, लेकिन सीएएस प्रक्रिया नियमित न होने से वे लंबे समय से इसके लाभ से वंचित थे।

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कुलगुरु डॉ. आर.बी. दुबे ने पदोन्नति के वर्गीकरण की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में कुल 57 शिक्षकों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें स्टेज-1 (सहायक आचार्य – एजीपी 6000) से स्टेज-2 (एजीपी 7000) में पदोन्नति के लिए 20 सहायक आचार्य योग्य पाए गए हैं। इसी प्रकार, स्टेज-2 (एजीपी 7000) से स्टेज-3 (एजीपी 8000) के लिए 23 शिक्षकों ने तथा एसोसिएट प्रोफेसर स्टेज-4 (एजीपी 9000) से प्रोफेसर स्टेज-5 (एजीपी 10000) के लिए 14 आवेदन प्राप्त हुए हैं। कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि पात्र शिक्षकों को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार का शपथ पत्र देने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। यह संपूर्ण प्रक्रिया यूजीसी रेगुलेशंस 2010 (UGC Regulations 2010) के अनुरूप की जा रही है, जिसकी स्क्रीनिंग वर्तमान में प्रक्रियाधीन है।

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यह रहेगी पदोन्नति की अर्हता और चयन प्रक्रिया
डॉ. दुबे ने बताया कि सीएएस के तहत सहायक आचार्य के स्टेज-1 से स्टेज-2 में पदोन्नति के लिए पीएचडी धारकों हेतु 4 वर्ष तथा बिना पीएचडी धारकों के लिए 6 वर्ष की सेवा योग्यता आवश्यक है। स्टेज-2 से स्टेज-3 में जाने के लिए 5 वर्ष तथा स्टेज-3 से स्टेज-4 में जाने के लिए 3 वर्ष का अनुभव अनिवार्य है। इन आवेदनों की स्क्रूटनी के लिए बाहर से विशेष विशेषज्ञों को आमंत्रित कर स्क्रीनिंग करवाई जाएगी। वहीं दूसरी ओर, एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर (स्टेज-5) बनने के लिए 3 वर्ष का अनुभव अनिवार्य है। इस वर्ग की पदोन्नति के लिए सीधी भर्ती की तर्ज पर ही निर्धारित प्रक्रिया अपनाते हुए नवगठित बोर्ड के माध्यम से बाकायदा साक्षात्कार (इंटरव्यू) लिए जाएंगे।

अशैक्षणिक कार्मिकों को पहले ही मिल चुका है लाभ; पेंशन विसंगति पर भी प्रयास तेज
उल्लेखनीय है कि कुलगुरु के विशेष प्रयासों से हाल ही में विश्वविद्यालय के 27 अशैक्षणिक कार्मिकों को ‘अशैक्षणिक कर्मचारी नियुक्ति एवं पदोन्नति नियम-1998’ के तहत पदोन्नत किया जा चुका है। इनमें निजी सचिव, सहायक लेखाधिकारी प्रथम व द्वितीय, लिपिक ग्रेड प्रथम, सहायक अनुभाग अधिकारी, अनुभाग अधिकारी तथा कनिष्ठ लिपिक संवर्ग शामिल हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के पेंशनर्स की समस्याओं पर बोलते हुए कुलगुरु ने बताया कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नियमित पेंशन (60 प्रतिशत डीए भुगतान सहित) व अन्य परिलाभ समय पर दिलाने के लिए राज्य सरकार से लगातार संवाद जारी है।

विश्वविद्यालय पर वर्तमान में पेंशन संबंधी करीब 150 करोड़ रुपए का वित्तीय दायित्व बकाया है। हालांकि, सेवारत कार्मिकों का कोई वेतन या डीए एरियर बकाया नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल ऑडिट आक्षेप या वसूली की स्थिति को छोड़कर अन्य सभी मामलों में ग्रेच्युटी व पीएल का भुगतान समयबद्ध रूप से किया जा रहा है और शेष ग्रेच्युटी भुगतान भी प्रक्रियाधीन है। पूर्व में पेंशन एवं पीएफ का एक ही खाता होने के कारण पीएफ की राशि का उपयोग पेंशन भुगतान में हो गया था, जिसकी प्रतिपूर्ति (रिकवरी) करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी गंभीरता से जुटा है।

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