बीकानेर में MGSU के ‘NEFNS’ नियम पर मचा बवाल
बीकानेर में MGSU के 'NEFNS' नियम पर मचा बवाल



- छात्र हितों पर कुठाराघात के खिलाफ एकजुट हुए NSUI और ABVP
बीकानेर, 22 जून । महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय (MGSU) द्वारा स्नातक स्तर पर लागू किए गए नए नियम ‘NEFNS’ (नोट इलिजिबल फॉर नेक्स्ट सेशन) को वापस लेने की मांग को लेकर छात्र राजनीति पूरी तरह गर्मा गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस कथित छात्र विरोधी नीति के खिलाफ संभाग के प्रमुख छात्र संगठन लामबंद होने लगे हैं। जहां सत्तारूढ़ सरकार से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस नियम के विरोध में कुलगुरु को चेतावनी दी है, वहीं कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) ने भी सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन करते हुए आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है।


सोमवार को एनएसयूआई के छात्र नेता अभिमन्यु जाखड़ और रामनिवास तरड़ के संयुक्त नेतृत्व में सैकड़ों छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में धरना लगाया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्र नेताओं ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि ‘NEFNS’ नियम पूरी तरह से छात्र हितों के खिलाफ है और इससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है। प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई ने विवि प्रशासन को इस विसंगतिपूर्ण नियम को हटाने के लिए एक सप्ताह का स्पष्ट अल्टीमेटम (समय) दिया है। छात्र नेताओं ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर इस नियम को वापस नहीं लिया गया या इसका कोई उचित समाधान नहीं निकाला गया, तो अगले सोमवार से विश्वविद्यालय मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना व उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।


एबीवीपी ने कुलगुरु को सौंपा ज्ञापन; 5 दिन में नियम न बदलने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
दूसरी ओर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) बीकानेर के एक प्रतिनिधिमंडल ने महानगर मंत्री मेहुल शर्मा के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के कुलगुरु से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। एबीवीपी के वरिष्ठ छात्र नेता राकेश गोदारा ने कहा कि इस नए नियम के लागू होने से बीकानेर संभाग के लाखों विद्यार्थियों में भारी आक्रोश और मानसिक तनाव है। नियम की तकनीकी विसंगति को स्पष्ट करते हुए गोदारा ने बताया कि इसके अनुसार यदि पांचवें सेमेस्टर के किसी विद्यार्थी के किसी भी एक विषय में ‘बैक’ (अनुत्तीर्ण) आ जाती है, तो उसे आगामी सत्र की परीक्षा में बैठने से रोक दिया जाएगा। इस कड़े प्रावधान के कारण संभाग के लाखों नियमित विद्यार्थियों का पूरा एक साल खराब होने का सीधा खतरा मंडरा रहा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है।
एबीवीपी ने कुलगुरु से मांग की है कि विद्यार्थियों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए इस अव्यावहारिक नियम को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर राहत प्रदान की जाए। परिषद ने प्रशासन को सचेत किया कि यदि 5 दिन के भीतर इस नियम को वापस नहीं लिया गया, तो विद्यार्थी परिषद पूरे संभाग में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रबंधन की होगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान एबीवीपी के जिला संयोजक करण झारीवाल, महानगर सहमंत्री भागीरथ गोदारा, योगेंद्र सिंह तथा विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष हरीश सारण सहित अनेक छात्र कार्यकर्ता मौजूद रहे।


