बीकानेर में ‘म्यूल अकाउंट’ रैकेट का भंडाफोड़, देश के 68 लाख रुपये ठिकाने लगाने वाले तीन ग्रामीण युवक गिरफ्तार
देश के 68 लाख रुपये ठिकाने लगाने वाले तीन ग्रामीण युवक गिरफ्तार


- बीकानेर पुलिस की बड़ी कार्रवाई में स्कॉर्पियो सहित 15 मोबाइल जब्त
बीकानेर, 29 जून । बीकानेर जिला पुलिस की दो विशेष टीमों ने एक संयुक्त और त्वरित कार्रवाई करते हुए देशव्यापी साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने साइबर ठगी की अवैध रकम को अपने और अन्य लोगों के बैंक खातों में प्राप्त करने (रूट करने) वाले तीन शातिर आरोपियों को दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से कुल 68 लाख रुपए की ठगी से संबंधित शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज पाई गई हैं।


पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार— जयनारायण व्यास कॉलोनी (JNVसी) थाना और जिला साइबर थाना की संयुक्त टीम ने तकनीकी अनुसंधान के आधार पर जाल बिछाकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान रामस्वरूप (20) पुत्र मोहनराम जाट निवासी लालमदेसर बड़ा, मुन्नीराम (21) पुत्र हेमाराम जाट निवासी तेजरासर तथा सीताराम (20) पुत्र बाबूलाल जाट निवासी लालमदेसर बड़ा (सभी जिला बीकानेर) के रूप में हुई है।


टेलीग्राम ग्रुप के जरिए संचालित होता था पूरा नेटवर्क, 10% कमीशन का खेल
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ और तकनीकी जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये तीनों आरोपी मुख्य साइबर ठग गिरोह के साथ मिलकर ‘टेलीग्राम’ (Telegram) ग्रुप के जरिए जुड़े हुए थे। यह गिरोह देश के सीधे-साधे लोगों को चूना लगाकर अवैध रूप से रकम ऐंठता था। गिरफ्तार आरोपी बीकानेर में रहकर कमीशन के लालच में अपने खुद के तथा अन्य ग्रामीण व भोले-भाले लोगों के नाम से फर्जी बैंक खाते (जिन्हें साइबर अपराध की भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है) तैयार करवाकर गिरोह को उपलब्ध कराते थे।
देशभर से साइबर ठगी के जरिए हासिल की गई काली कमाई को सबसे पहले इन्हीं खातों में ट्रांसफर करवाया जाता था। इसके बाद, मुख्य गिरोह द्वारा टेलीग्राम पर भेजी गई नई बैंक डिटेल्स के अनुसार ये आरोपी उस रकम को आगे के खातों में ट्रांसफर (लेयरिंग) कर देते थे। इस पूरे अवैध ट्रांजैक्शन और बैंक खाते उपलब्ध करवाने के बदले में आरोपी कुल रकम का 10 प्रतिशत हिस्सा बतौर कमीशन अपने पास रख लेते थे।
बीकानेर में 6 महीने से सक्रिय थे आरोपी; आधार, पैन और एटीएम सहित भारी मात्रा में सामग्री जब्त
आरोपियों के बैंक खातों के रिकॉर्ड और स्टेटमेंट की बारीकी से जांच करने पर पता चला कि इन खातों में अब तक करीब 68 लाख रुपए की साइबर ठगी की राशि जमा करवाई जा चुकी है। पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे पिछले 6 महीने से बीकानेर शहर में एक गुप्त ठिकाने पर रहकर इस अंतरराष्ट्रीय व अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क के लिए स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे थे।
पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने पर छापेमारी कर उनके कब्जे से अपराध में प्रयुक्त और ठगी की रकम से खरीदी गई एक आलीशान स्कॉर्पियो गाड़ी सहित भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। जब्त की गई सामग्री का विवरण इस प्रकार है।
मोबाइल व सिम: 15 आधुनिक मोबाइल फोन और 9 सक्रिय सिम कार्ड।
बैंकिंग दस्तावेज: 3 बैंक पासबुक, 3 चेकबुक और विभिन्न बैंकों के 8 सक्रिय एटीएम (ATM) कार्ड।
पहचान पत्र: 4 आधार कार्ड और 3 पैन कार्ड (विभिन्न नाम-पतों के)।
मास्टरमाइंड की तलाश तेज; पुलिस ने कहा— “खाता किराए पर देना पड़ेगा महंगा”
बीकानेर पुलिस का कहना है कि जब्त किए गए मोबाइल और डिजिटल दस्तावेजों का साइबर फॉरेंसिक टीम द्वारा तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) किया जा रहा है। इस पूरे गिरोह का संचालन करने वाले मुख्य सरगना और टेलीग्राम ग्रुप के मास्टरमाइंड की लोकेशन ट्रेस कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें रवाना की गई हैं। इसके साथ ही, ठगी के शिकार हुए लोगों को राहत दिलाने के लिए आरोपियों के सभी बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज (सीज) करवाने की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इस बड़े खुलासे के बाद बीकानेर पुलिस ने आम जनता के लिए एक विशेष चेतावनी और अपील जारी की है। पुलिस ने कहा है कि कोई भी नागरिक थोड़े से कमीशन, पैसों के लालच या किसी परिचित के बहकावे में आकर अपना बैंक खाता, पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड या अपने नाम से जारी मोबाइल सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए कतई न दें। ऐसा करना कानूनन गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा करने पर खाताधारक को भी मुख्य साइबर अपराधियों का मददगार मानते हुए मामले में सह-आरोपी बनाया जाएगा और जेल की हवा खानी पड़ सकती है।


