आत्मावलोकन का पर्व है पर्यूषण: डॉ. मुनि पुलकित कुमार

आत्मावलोकन का पर्व है पर्यूषण: डॉ. मुनि पुलकित कुमार
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  • माधावरम में मनाया गया सामायिक दिवस

चेन्नई ,10 सितंबर । युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान सुशिष्य डॉ. मुनिश्री पुलकित कुमार जी के पावन सान्निध्य में माधावरम में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का तृतीय दिवस ‘सामायिक दिवस’ के रूप में अत्यंत भावपूर्ण माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने सामायिक और ध्यान के माध्यम से आत्मचिंतन व आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाया।

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सामायिक और पर्युषण का आध्यात्मिक महत्व
डॉ. मुनि पुलकित कुमार जी: उन्होंने पर्युषण महापर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन परंपरा में पर्यूषण आत्मावलोकन का सबसे बड़ा पर्व है, जिसे चातुर्मास काल का सबसे महत्वपूर्ण अंग माना गया है। इसकी परंपरा तीर्थंकर भगवान महावीर के समय से निरंतर चली आ रही है।

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समत्वभाव की प्रेरणा: सामायिक दिवस के संदर्भ में मुनिश्री ने कहा कि सामायिक का अर्थ समत्वभाव में लीन होना है। यह जीवन शैली व स्वभाव में परिवर्तन लाने और आत्मचिंतन करने की एक पवित्र प्रक्रिया है। उन्होंने भगवान महावीर के अनन्य श्रावक पूनिया श्रावक की प्रसिद्ध सामायिक का उदाहरण देते हुए श्रावक समाज को प्रतिदिन 48 मिनट की इस धर्म-साधना को नियमित करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने श्रद्धालुओं को बीते जीवन के प्रत्येक दिवस के बदले एक-एक सामायिक करने का संकल्प दिलाया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और तप-आराधना
अभिनव सामायिक प्रयोग: नचिकेता मुनि आदित्य कुमार जी ने सामायिक दिवस पर भक्तिमय गीत प्रस्तुत किया तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को ‘अभिनव सामायिक’ का आध्यात्मिक प्रयोग करवाया।

संस्थाओं की सहभागिता: कार्यक्रम का मंगलाचरण तेरापंथ युवक परिषद माधावरम के अध्यक्ष कोमल डागा एवं सदस्यों द्वारा किया गया। इसके बाद माधावरम तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने सामायिक दिवस पर सुमधुर गीतिका की प्रस्तुति दी।

चंदनबाला तेला का प्रत्याख्यान: पर्युषण पर्व के तहत तप-साधना के प्रति श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। माधावरम तेरापंथ सभा के अध्यक्ष महेंद्र मांडोत सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने मुनि श्री से ‘चंदनबाला तेले’ का पचक्खान (प्रत्याख्यान) ग्रहण कर तपस्या का संकल्प लिया।

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