साहित्य, संगीत और सृजन का संगम: बीकानेर में ‘शरद संगत’ का तीसरा सफल आयोजन

बीकानेर में 'शरद संगत' का तीसरा सफल आयोजन
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बीकानेर, 7 अक्टूबर। साहित्य, संगीत और सृजन के अनूठे संगम ‘शरद संगत’ की वार्षिक श्रृंखला की तीसरी कड़ी का आयोजन शरद पूर्णिमा के अवसर पर ब्रह्म बगीचा परिसर में किया गया। दक्ष के तत्वावधान में तथा रोटरी रॉयल्स और अरज के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के साहित्यप्रेमी और गणमान्यजनों ने देर रात तक कला और काव्य का आनंद लिया।
दूध-जलेबी का प्रसाद और आयोजन का उद्देश्य
आयोजनकर्ता शशांक शेखर जोशी ने बताया कि ‘शरद संगत’ की शुरुआत तीन वर्ष पूर्व इस उद्देश्य से की गई थी कि साहित्यप्रेमी शरद पूर्णिमा की अमृत रश्मियों के तले साहित्य, संगीत, ग़ज़ल और गीतों का आनंद ले सकें। इस अवसर पर परंपरा के अनुसार, अतिथियों का स्वागत दूध-जलेबी प्रसाद से किया गया, जिसके पीछे यह मान्यता है कि इस दिन आकाश से बरसता अमृत दूध में मिलकर जीवन को पुष्ट करता है। कार्यक्रम का शुभारंभ राजनारायण पुरोहित की गणपति वंदना से हुआ।

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कला, कविता और संगीत की अमृतमयी रात
यह अमृतमयी रात एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों से सजी रही, जहाँ कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मनीषा आर्य सोनी के गीतों ने सभी को मंत्रमुग्ध किया, जबकि विप्लव व्यास और आनंद मस्ताना के गीतों की सम्मोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। गौरीशंकर सोनी के शास्त्रीय सुरों ने पूर्णिमा की रात को और उजास दिया।

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कविता और ग़ज़ल: मोनिका गौड़ की लघु कविताओं और जुगल किशोर पुरोहित के गीतों ने खूब दाद बटोरी। धीरज व्यास की राजस्थानी कविता ने समूचे वातावरण को लोकरस से भर दिया। योगेश व्यास राजस्थानी ने इस बार हिंदी कविता प्रस्तुत कर अपनी सृजनशीलता को नई दिशा दी। कैलाश टाक की व्यंग्यात्मक कविता ने माहौल में हँसी की लहर पैदा की।

रचना पाठ: राजाराम स्वर्णकार, ज्योतिप्रकाश रंगा, बीडी हर्ष, शकूर सिसोदिया, संजय आचार्य, रविशंकर आचार्य, किशोर सिंह राजपुरोहित और शशांक शेखर जोशी की रचनाओं ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।

समापन और नई पीढ़ी की सराहना
कार्यक्रम का संयोजन रविंद्र हर्ष ने किया और संचालन अपने चिर-परिचित अंदाज़ में ज्योतिप्रकाश रंगा ने किया। समापन अवसर पर वरिष्ठ कवि-कथाकार राजेंद्र जोशी ने अपनी कविता प्रस्तुत की और आयोजन समिति का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बीकानेर की नई साहित्यिक पीढ़ी की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह नई पीढ़ी न केवल सक्षम है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण रचनाओं से साहित्य में नए मानदंड स्थापित करेगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बृजगोपाल जोशी, उमाशंकर आचार्य, सुनील चमड़िया, सुमित शर्मा, और अन्य साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

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