अनोखा दीक्षांत समारोह- 20 साल के लंबे इंतजार के बाद कलाकार को बीकानेर डाकघर में मिली मास्टर्स डिग्री
अनोखा दीक्षांत समारोह- 20 साल के लंबे इंतजार के बाद कलाकार को बीकानेर डाकघर में मिली मास्टर्स डिग्री


बीकानेर, 06 मई । राजस्थान की कला और शिक्षा जगत से एक बेहद दिलचस्प और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स (जयपुर) के वर्ष 2004-2005 बैच के प्रथम मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स (पेंटिंग) टॉपर योगेन्द्र के. पुरोहित को उनकी डिग्री पूरे 20 साल और 5 महीने के लंबे अंतराल के बाद प्राप्त हुई है। इस डिग्री को हासिल करने की प्रक्रिया किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही, जिसका सुखद अंत बीकानेर के मुख्य डाकघर में एक ‘अनौपचारिक दीक्षांत समारोह’ के रूप में हुआ।


सिस्टम की विडंबना: कॉलेज रिकॉर्ड से गायब था टॉपर का डेटा
डिग्री प्राप्त करने वाले कलाकार योगेन्द्र के. पुरोहित ने बताया कि राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स में खून-पसीना बहाकर प्रथम स्थान प्राप्त करने के बावजूद, कॉलेज के रिकॉर्ड रजिस्टर में उनकी डिग्री का कोई दस्तावेज दर्ज नहीं था। 20 वर्षों के बाद जब उन्होंने अपनी डिग्री के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर लगाए, तब जाकर यह कड़वा सच सामने आया। हालांकि, यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान के रिकॉर्ड ऑफिस और पुस्तकालय स्टाफ के सहयोग से 27 अप्रैल, 2026 को आवश्यक दस्तावेज और ₹410 की फीस जमा कर इस प्रक्रिया को पुनर्जीवित किया गया।


बीकानेर डाकघर बना दीक्षांत समारोह का केंद्र
यूनिवर्सिटी द्वारा डिग्री भारतीय डाक सेवा के माध्यम से बीकानेर भेजी गई। डिग्री हाथ से निकल न जाए, इस डर और उत्सुकता के बीच कलाकार ने बीकानेर के मुख्य डाकघर में कार्यरत प्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि और साहित्यकार श्री बाबूलाल छंगाणी से संपर्क किया। श्री छंगाणी ने मामले की संजीदगी को समझते हुए सुबह ही उन्हें डाकघर बुलाया और पोस्टमैन मास्टर दीपक के सहयोग से वह महत्वपूर्ण लिफाफा तलाशा।

साहित्यकार के हाथों मिला सम्मान
डाकघर के प्रांगण में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब वरिष्ठ साहित्यकार बाबूलाल छंगाणी ने अपने कर-कमलों से कलाकार को उनकी 20 साल पुरानी डिग्री ससम्मान सौंपी। कलाकार ने इस क्षण को याद करते हुए कहा, “जो काम दो दशक पहले विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में होना चाहिए था, वह आज बीकानेर डाकघर के प्रांगण में संपन्न हुआ। मुझे ऐसा महसूस हुआ मानो विश्वविद्यालय ने श्री छंगाणी के आतिथ्य में मेरे लिए विशेष समारोह आयोजित किया हो।”
एआई (AI) के जरिए पूरा किया सपना
एक कलाकार होने के नाते, उन्होंने इस ऐतिहासिक पल की डिजिटल स्मृतियों को संजोने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया। उन्होंने डाकघर में डिग्री प्राप्त करते समय की तस्वीरों को एआई के माध्यम से एक औपचारिक दीक्षांत समारोह के स्वरूप में ढालकर अपनी बरसों पुरानी ‘मृग तृष्णा’ को शांत किया।
अंततः, 10 दिनों की त्वरित कार्रवाई के बाद मिली इस डिग्री ने सिस्टम की खामियों पर व्यंग्य तो किया ही, साथ ही ‘अंत भला तो सब भला’ की कहावत को भी चरितार्थ कर दिया। (योगेन्द्र के. पुरोहित की फेसबुक प्रोफाइल से)

