बच्चों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य के लिए सभी संस्थाओं को मिलकर प्रयास करना होगा
बच्चों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य के लिए सभी संस्थाओं को मिलकर प्रयास करना होगा



- बीकानेर जोनल फोर्सेज नेटवर्क की बैठक आयोजित
बीकानेर, 30 सितम्बर । प्रौढ़ शिक्षा भवन में बुधवार को राजस्थान फोर्सेज एवं उरमूल सीमांत समिति के संयुक्त तत्वावधान में बीकानेर जोनल फोर्सेज नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में नेटवर्क से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ एवं बेहतर भविष्य के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।


सुरक्षित वातावरण व मानसिक सहारा आज की सबसे बड़ी जरूरत


बैठक को संबोधित करते हुए इको सिस्टम मैनेजर रामप्रसाद हर्ष ने कहा कि आज बच्चों की सबसे बड़ी आवश्यकता केवल अच्छी शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित वातावरण, मानसिक सहारा और ऐसा समाज प्रदान करना है जहाँ वे अपनी बात बिना किसी भय के रख सकें। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रारंभिक देखभाल बेहद आवश्यक है और बीकानेर जिले में बाल अधिकारों व समस्याओं के समाधान के लिए सभी संस्थाओं को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।
मानसिक तनाव, संवादहीनता और पोषण पर हुई गंभीर चर्चा
बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति के मुकेश व्यास ने सामाजिक अपेक्षाओं के बढ़ते दबाव के कारण बच्चों में उत्पन्न हो रहे मानसिक तनाव पर चिंता व्यक्त की और परिवार, स्कूल व समाज के संयुक्त प्रयास पर जोर दिया। जन शिक्षण संस्थान के निदेशक ओमप्रकाश सुथार ने अभिभावकों और बच्चों के बीच संवाद की कमी को रेखांकित करते हुए कहा कि बच्चों की मानसिक समस्याओं को महज उम्र का असर मानकर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
नोखा से उरमूल ज्योति के सचिव चेतनराम गोदारा ने संस्थाओं की एकजुटता को बड़ी ताकत बताया, वहीं उरमूल सीमांत के अशोक भाटी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और भविष्य में रोजगार की तैयारी को महत्वपूर्ण माना। अजीत फाउंडेशन के प्रतिनिधि महेश उपाध्याय ने बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और बाल मजदूरी, बाल विवाह, शोषण तथा बुलिंग जैसी कुरीतियों के उन्मूलन हेतु समाज को गंभीर कदम उठाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्लान इंडिया के फतेह सिंह भाटी, एफईएस के बीरबल राज, मरू शक्ति संस्थान के बुद्धराम, उरमूल ट्रस्ट के रेवंतराम, उरमूल सेतु के मालाराम, डेजर्ट रिसोर्स सेंटर के भोजराज सिंह तथा परंपरा संस्था से चंद्रकला व्यास सहित कई प्रबुद्ध प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
