बेटे के निधन के बाद अनिल अग्रवाल का बड़ा फैसला,अपनी 75% संपत्ति करेंगे दान, सादगी से बिताएंगे शेष जीवन

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल व बेटे अग्निवेश अग्रवाल
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नई दिल्ली, 8 जनवरी। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन और मशहूर उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने अपने जीवन के सबसे दुखद मोड़ पर एक ऐसा संकल्प लिया है, जिसने पूरे देश को भावुक कर दिया है। अपने 49 वर्षीय बेटे अग्निवेश अग्रवाल के असामयिक निधन के बाद, उन्होंने घोषणा की है कि वह अपनी कुल संपत्ति का 75 प्रतिशत हिस्सा समाज सेवा के लिए दान कर देंगे। अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि वह अब अपनी बाकी की पूरी जिंदगी बेहद सादगी के साथ इसी उद्देश्य को पूरा करने में समर्पित करेंगे।

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अग्निवेश अग्रवाल का हाल ही में अमेरिका में इलाज के दौरान कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया था। इस गहरे दुख को साझा करते हुए अनिल अग्रवाल ने एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने जो कुछ भी कमाया है, उसका बड़ा हिस्सा समाज को लौटाने का वादा उन्होंने अपने बेटे से किया था। अब बेटे के जाने के बाद यह वादा उनके लिए एक मिशन बन गया है। उन्होंने लिखा कि यद्यपि वे और उनकी पत्नी किरण अग्रवाल इस क्षति से टूट चुके हैं, लेकिन वेदांता परिवार के कर्मचारी ही अब उनकी ताकत हैं।

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कबाड़ से साम्राज्य तक: संघर्ष और विरासत

1954 में पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल की कहानी एक प्रेरणादायक मिसाल है। मात्र 19 साल की उम्र में पटना से मुंबई का सफर तय करने वाले अग्रवाल ने कबाड़ के कारोबार से शुरुआत की थी। 1976 में उन्होंने वेदांता ग्रुप की नींव रखी, जो आज माइनिंग, ऑयल, पावर और मेटल सेक्टर में दुनिया की अग्रणी कंपनियों में से एक है। फोर्ब्स के अनुसार, उनकी कुल नेटवर्थ लगभग 35,000 करोड़ रुपये (4.2 अरब डॉलर) आंकी गई है, जिसका अधिकांश हिस्सा अब जनकल्याण के कार्यों में लगाया जाएगा।

भविष्य की जिम्मेदारी और अधूरे सपने
बेटे के निधन के बाद अब परिवार और कारोबार की बड़ी जिम्मेदारी उनकी बेटी प्रिया अग्रवाल के कंधों पर है, जो वर्तमान में हिंदुस्तान जिंक की चेयरपर्सन हैं। उनके भाई नवीन अग्रवाल भी ग्रुप में वाइस चेयरमैन के रूप में सक्रिय हैं। अनिल अग्रवाल ने संकल्प लिया है कि वे अपने बेटे के उन सपनों को पूरा करेंगे जो उन्होंने साथ देखे थे—जैसे भारत को आत्मनिर्भर बनाना, बाल कुपोषण को मिटाना और महिला सशक्तिकरण। उन्होंने कहा, “बेटे के बिना मेरी जिंदगी अधूरी जरूर है, लेकिन उसके सपने अधूरे नहीं रहेंगे।”

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