टीईटी समीक्षा याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से प्रभावित लाखों शिक्षकों को तत्काल राहत दे सरकार

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अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की

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बीकानेर, 30 मई । शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी-TET) प्रकरण से संबंधित समीक्षा याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के हालिया फैसले के बाद देशभर के शिक्षा जगत में खलबली मच गई है। इस निर्णय से उत्पन्न हुई नई परिस्थितियों और देश के लाखों शिक्षकों के भविष्य पर मंडराते संकट को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। महासंघ ने केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की है कि इस फैसले से प्रभावित होने वाले लाखों शिक्षकों को मानवीय आधार पर तत्काल राहत प्रदान की जाए।

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सरकारी नियमों के तहत हुई थीं नियुक्तियां: रमेश पुष्करणा
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस हालिया निर्णय के बाद से देशभर के लाखों शिक्षकों में अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर भारी असुरक्षा और चिंता का माहौल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित शिक्षकों की नियुक्तियां कोई अवैध या बैकडोर एंट्री नहीं थीं, बल्कि उस समय तत्कालीन सरकारों द्वारा जारी प्रचलित नियमों, दिशा-निर्देशों और आधिकारिक अधिसूचनाओं के अनुरूप सक्षम वैधानिक प्राधिकरणों द्वारा पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई थीं। पुष्करणा ने कहा कि जो शिक्षक पिछले कई वर्षों से विद्यालयों में पूरी निष्ठा और समर्पित भाव से राष्ट्र के नौनिहालों का भविष्य संवार रहे हैं, उन्हें अचानक इस तरह अनिश्चितता और असमंजस की स्थिति में धकेल देना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। सरकार को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता दांव पर- महेन्द्र कुमार लखारा
महासंघ के प्रदेश महामंत्री महेन्द्र कुमार लखारा ने इस संकट के दूरगामी परिणामों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का यह प्रश्न केवल उनकी व्यक्तिगत आजीविका या परिवारों के पालन-पोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता, निरंतरता और गुणवत्ता से भी सीधा जुड़ा हुआ गंभीर विषय है। यदि इस निर्णय के बाद इतने बड़े पैमाने पर अनुभवी और सेवारत शिक्षकों के भविष्य पर ही प्रश्नचिह्न लग जाएगा, तो इसका सीधा और बेहद प्रतिकूल प्रभाव सरकारी विद्यालयों के सुचारू संचालन तथा करोड़ों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आगामी संसद के मानसून सत्र में आवश्यक विधायी संशोधन करके अथवा तुरंत एक विशेष अध्यादेश (Ordinance) लाकर इन प्रभावित शिक्षकों को पूर्ण कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए।

मानवीय और प्रशासनिक दृष्टिकोण अपनाए सरकार- रवि आचार्य
महासंघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य ने पूर्व के कई उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब ऐसा संकट आया हो। पूर्व में भी सरकारों ने व्यापक जनहित, सामाजिक न्याय और संस्थागत स्थिरता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विषम परिस्थितियों में विधायी उपायों और विशेष कानूनों के माध्यम से कर्मचारियों को राहत और सेवा संरक्षण प्रदान किया है। वर्तमान टीईटी प्रकरण में भी केंद्र सरकार को पूरी तरह से मानवीय, संवेदनशीलता और प्रशासनिक दृष्टिकोण अपनाते हुए लाखों परिवारों के हित में एक ठोस और साहसिक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि शिक्षक समाज का दर्पण हैं और वे वर्षों से राष्ट्र निर्माण के बुनियादी कार्य में लगे हुए हैं; ऐसे में उनकी सेवा सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना कल्याणकारी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
महासंघ के शीर्ष नेतृत्व ने उम्मीद और विश्वास व्यक्त किया है कि केंद्र सरकार देश के शिक्षकों की इन जायज भावनाओं, चिंताओं और उनके परिवारों के भविष्य के प्रति पूरी संवेदनशीलता रखते हुए शीघ्र ही कोई सकारात्मक और राहतकारी रास्ता निकालेगी।

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