बीकानेर स्थापना दिवस: 539 साल के गौरव का उत्सव
बीकानेर स्थापना दिवस: 539 साल के गौरव का उत्सव


बीकानेर, 19 अप्रैल । मरुधरा की ऐतिहासिक नगरी बीकानेर आज अपना 539वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मना रही है। अक्षय द्वितीया के इस पावन अवसर पर समूचा शहर उत्सव के रंग में डूबा है। सुबह से ही घरों की छतों पर पतंगबाजी का दौर शुरू हो गया है, जो देर रात तक “बोय काट्या” की गूंज के साथ जारी रहेगा।


चंदा उड़ाने की 539 साल पुरानी परंपरा
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में राव बीकाजी द्वारा शुरू की गई चंदा उड़ाने की परंपरा आज भी जीवंत है। जूनागढ़ परिसर और परकोटे के भीतर लगभग 4 फीट व्यास का गोल चंदा रस्सी के सहारे आसमान में लहराया गया। कीकाणी व्यासों के चौक सहित विभिन्न स्थानों पर उड़ाए जाने वाले इन चंदों के माध्यम से इस वर्ष “खेजड़ी बचाओ” और “बाल विवाह रोको” जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।


खीचड़ा और इमलाणी का पारंपरिक स्वाद
बीकानेर की संस्कृति में इस दिन का विशेष भोजन इसकी पहचान है। आज अक्षय द्वितीया पर घर-घर में गेहूं का खीचड़ा बनाया गया। अखंडता और एकता के प्रतीक इस व्यंजन के साथ इमली से बनी ‘इमलाणी’ का सेवन किया जा रहा है, जो तपती धूप में पतंगबाजों को लू से बचाने के लिए एक प्राकृतिक शीतल पेय का कार्य करती है।
गंगाशहर में वर्षीतप अभिनंदन समारोह का तृतीय दिवस
एक ओर जहाँ पूरा शहर स्थापना दिवस मना रहा है, वहीं जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के तत्वावधान में वर्षीतप अभिनंदन समारोह का तीसरा दिन आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। मुनि श्री अमृत कुमार जी के सान्निध्य में बोथरा भवन में आयोजित त्रिदिवसीय समारोह में46 तपस्वियों का भावभीना अभिनंदन किया गया। मुनि श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि तप केवल आध्यात्मिक मार्ग नहीं, बल्कि शरीर और आत्मा को शुद्ध करने वाली सर्वोत्तम औषधि है।
कल होगा महा-पारणा
इस उत्सव की पूर्णाहुति कल अक्षय तृतीया पर होगी। शांतिनिकेतन सेवा केंद्र में साध्वी श्री त्रिशला कुमार जी के सान्निध्य में भव्य पारणा समारोह आयोजित होगा, जहां वर्षीतप आराधक एक साथ अपनी तपस्या का पारणा करेंगे।
