बीकानेर की कुलदेवी श्री नागणेची माता मंदिर के जीर्णोद्धार को नहीं मिला फंड, बजट में उपेक्षा से श्रद्धालुओं में भारी रोष

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बीकानेर, 12 फ़रवरी। राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में बीकानेर की आस्था के प्रमुख केंद्र और राजपरिवार की कुलदेवी श्री नागणेची माता मंदिर की अनदेखी किए जाने पर स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। लाखों लोगों की श्रद्धा का केंद्र होने के बावजूद, इस ऐतिहासिक मंदिर के विकास और संरक्षण के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जबकि यहाँ वर्ष भर में चैत्र और शारदीय नवरात्र सहित चार बड़े मेले आयोजित होते हैं।

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मंदिर के नियमित दर्शनार्थियों और प्रबंध समिति से जुड़े सदस्यों का कहना है कि मंदिर परिसर वर्तमान में उपेक्षा का शिकार है। ऐतिहासिक दीवारों में सीलन के कारण वे जर्जर अवस्था में पहुँच गई हैं। परिसर स्थित नीचे के चामुंडा माता मंदिर और शिव मंदिर की स्थिति भी चिंताजनक है, जहाँ दशकों से जीर्णोद्धार का कार्य नहीं हुआ है। आलम यह है कि बरसात के समय इन मंदिरों की छतों से पानी का रिसाव होता रहता है, जिससे प्राचीन संरचना को खतरा पैदा हो गया है।

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सुविधाओं का अभाव और सुरक्षा की चिंता
श्रद्धालुओं ने बताया कि मंदिर में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। सबसे बड़ी समस्या प्रसादी तैयार करने की व्यवस्था को लेकर है। वर्तमान में निज मंदिर के भीतर ही प्रसादी तैयार कर वितरित की जाती है, जो सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। श्रद्धालुओं का मानना है कि किसी संकरी जगह पर अग्नि कार्य होने से कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है, लेकिन इसके बावजूद अलग से रसोई या प्रसादी घर की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

देवस्थान विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
एडवोकेट हनुमान प्रसाद शर्मा, भवानी सिंह और पवन चांडक सहित अन्य भक्तों ने बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार और यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए देवस्थान विभाग को बार-बार अवगत कराया जाता रहा है। बावजूद इसके, विभाग की ओर से इस ऐतिहासिक धरोहर की सुध नहीं ली जा रही है। बीकानेर देवस्थान विभाग की इस उदासीनता के कारण मंदिर का भौतिक ढांचा लगातार कमजोर होता जा रहा है।

श्रद्धालुओं ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि हिंदू देवालयों के संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराते हुए श्री नागणेची माता मंदिर के लिए विशेष बजट आवंटित किया जाए। उन्होंने मांग की है कि मंदिर की ऐतिहासिकता को बनाए रखते हुए यहाँ आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएं ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध हो सकें।

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