अपनी ही सरकार पर बरसे भाजपा विधायक जेठानंद व्यास, पीबीएम अस्पताल में ‘नौकरी के बदले वसूली’ का खोला कच्चा चिट्ठा

अपनी ही सरकार पर बरसे भाजपा विधायक जेठानंद व्यास, पीबीएम अस्पताल में 'नौकरी के बदले वसूली' का खोला कच्चा चिट्ठा
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बीकानेर, 16 फरवरी। राजस्थान की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बीकानेर पश्चिम से भारतीय जनता पार्टी के विधायक जेठानंद व्यास ने सार्वजनिक मंच से अपनी ही सरकार के प्रशासनिक तंत्र पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप जड़ दिए। विधायक व्यास ने बीकानेर संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में चल रहे ‘महा-करप्शन’ का खुलासा करते हुए कहा कि वहां प्लेसमेंट के नाम पर युवाओं से सरेआम लूट मची है।

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एक कॉलेज के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए विधायक व्यास ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि अस्पताल में एक प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से हुई 210 नर्सिंग कर्मियों की भर्ती में भारी लेनदेन हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरी के नाम पर प्रत्येक अभ्यर्थी से एक-एक लाख रुपये की वसूली की जा रही है।

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“मेरी सिफारिश भी नहीं आई काम, उनसे भी वसूल लिए पैसे”
विधायक जेठानंद व्यास की नाराजगी उस वक्त चरम पर दिखी जब उन्होंने चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी और बेखौफ हो चुकी हैं कि जिन अभ्यर्थियों के लिए मैंने स्वयं सिफारिश की थी, भ्रष्टाचारियों ने उन्हें भी नहीं बख्शा और उनसे भी पैसे वसूल लिए।”

विधायक ने मंच से ही अस्पताल प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह शर्मनाक स्थिति है। उन्होंने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि वे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और इस तरह की अवैध वसूली को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

विपक्ष को मिला मुद्दा, सरकार की बढ़ी मुश्किलें
सत्ताधारी दल के विधायक द्वारा व्यवस्था पर उठाए गए इन सवालों ने विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

प्रशासनिक साख पर सवाल: विधायक के आरोपों से पीबीएम अस्पताल प्रबंधन और प्लेसमेंट एजेंसियों की कार्यप्रणाली शक के घेरे में आ गई है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: जेठानंद व्यास ने स्पष्ट किया कि वे भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ हैं, भले ही सरकार उनकी अपनी पार्टी की हो।

पीबीएम प्रशासन में मची खलबली
विधायक के इस ‘विस्फोटक’ बयान के बाद पीबीएम अस्पताल प्रशासन और संबंधित प्लेसमेंट एजेंसी में खलबली मच गई है। अभी तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि मामला तूल पकड़ने पर उच्च स्तरीय जांच बैठाई जा सकती है।

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