नीलगाय से भिड़ी स्कूटी ने खोला ड्रग-तस्करों का नया पैटर्न: बाइक-स्कूटी से सेफ हाउस पहुंच रही 120 करोड़ की हेरोइन, बेरोजगार और केटरर्स बने डिलीवरी बॉय
नीलगाय से भिड़ी स्कूटी ने खोला ड्रग-तस्करों का नया पैटर्न


लूणकरणसर (बीकानेर), 05 अगस्त । भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे बीकानेर संभाग में ड्रग तस्करों का नया और शातिर पैटर्न उजागर हुआ है। पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए खेतों में गिराई जाने वाली ड्रग्स को अब भारी वाहनों के बजाय बाइक और स्कूटी से सेफ हाउस तक पहुंचाया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, पिछले 6 महीनों में दो अलग-अलग कार्रवाइयों में बीकानेर पुलिस बाइक और स्कूटी सवारों से करीब 120 करोड़ रुपये कीमत की हेरोइन बरामद कर चुकी है।


इस नए नेटवर्क का पर्दाफाश 21 अप्रैल 2026 को हुआ, जब एक तस्कर की स्कूटी नीलगाय से टकरा गई। इस हादसे ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए।


नीलगाय की टक्कर से खुली तस्करों की पोल
21 अप्रैल को पूगल थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में घायल होकर बेहोश पड़े 22 वर्षीय खेताराम मेघवाल (निवासी पाली) को पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया। जब पुलिस उसकी स्कूटी थाने लाई और जांच की, तो उसमें से 14 किलो (अनुमानित अंतरराष्ट्रीय कीमत 70 करोड़ रुपये) ‘अफगान मार्का’ हेरोइन बरामद हुई।
दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल खेताराम की बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी सेंटर में न्यूरोसर्जरी की गई। होश में आने के बाद जब उससे पूछताछ की गई, तो तस्करी के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के मुख्य मास्टरमाइंड राकेश प्रजापत (निवासी पाली) का नाम उजागर हुआ। पुलिस ने राकेश प्रजापत पर 75 हजार रुपये (बीकानेर पुलिस द्वारा 50 हजार और पाली पुलिस द्वारा 25 हजार) का इनाम घोषित किया है।
बाइक से 10 किलो हेरोइन और विदेशी हथियारों का जखीरा जब्त
इसके बाद 2 अगस्त 2026 को एसपी मृदुल कच्छावा के निर्देशन में बीकानेर डीएसटी और खाजूवाला थाना पुलिस ने ‘ऑपरेशन शॉक वेव’ के तहत दूसरी बड़ी सफलता हासिल की। खाजूवाला क्षेत्र में 32 हेड स्थित चक 6 बीडी चेकपोस्ट पर पुलिस ने बाइक सवार वीरेंद्र सिंह राजपुरोहित (निवासी जैतारण, पाली) को दबोचा।
तलाशी में उसके पास से 10 किलो अफगान मार्का हेरोइन (कीमत करीब 50 करोड़ रुपये), 11 विदेशी पिस्टल , 22 मैगजीन ,100 जिंदा कारतूस बरामद हुए।
पुलिस से बचने के लिए बदला तरीका, बेरोजगारों को बना रहे मोहरा
लूणकरणसर के वृत्त अधिकारी (CO) रणवीर सिंह ने बताया कि तस्करों के हैंडलर अब पुलिस की निगरानी और नाकेबंदी से बचने के लिए चार पहिया या भारी वाहनों के स्थान पर दुपहिया वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं।
इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस की नजरों से बचने के लिए तस्कर सीमावर्ती जिलों (जैसे बीकानेर, श्रीगंगानगर) के बजाय मारवाड़ और जयपुर के युवाओं को लालच देकर ‘डिलीवरी बॉय’ बना रहे हैं। पकड़े गए आरोपियों में खेताराम और वीरेंद्र पाली जिले के रहने वाले हैं, जबकि गिरोह से जुड़े राहुल और प्रशांत जैसे अन्य आरोपी बीकानेर और जयपुर में कैटरिंग का काम करते थे।
तस्करों के इस नए मॉड्यूल के सामने आने के बाद बीकानेर पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने सीमावर्ती क्षेत्रों में दोपहिया वाहनों की गहन जांच और निगरानी बढ़ा दी है।


