“सारथी” पोर्टल की तकनीकी खामी से बीकानेर में ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल ठप, आरटीओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे आवेदक

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बीकानेर, 07 मई। डिजिटल इंडिया के दौर में जहां सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन और सुगम बनाने का दावा किया जा रहा है, वहीं बीकानेर डीटीओ (जिला परिवहन कार्यालय) में ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल की प्रक्रिया पिछले एक सप्ताह से सिरदर्द बनी हुई है। “सारथी” पोर्टल पर मोबाइल नंबर अपडेट से जुड़ी तकनीकी त्रुटि (Error) के कारण सैकड़ों आवेदन अटक गए हैं, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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पोर्टल पर मोबाइल नंबर का “एरर”, ऑफिस में एडमिन आईडी का बहाना
आवेदकों का कहना है कि जब वे ऑनलाइन रिन्यूअल के लिए आवेदन करते हैं, तो पोर्टल पर मोबाइल नंबर अपडेट करने में त्रुटि दिखाई देती है और संबंधित विभाग से संपर्क करने का संदेश आता है। विडंबना यह है कि जब आवेदक इस समस्या के समाधान के लिए डीटीओ कार्यालय की लाइसेंस शाखा में पहुँचते हैं, तो वहां तैनात कर्मचारी ‘एडमिन आईडी’ से सुधार होने की बात कहकर उन्हें वापस लौटा देते हैं। इस खींचतान में शहर और दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग भीषण गर्मी में चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

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गुजरात से आए चालक और ग्रामीण आवेदक परेशान
समस्या की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोलायत तहसील से आए आवेदक कुंभाराम और गुजरात में कार्यरत भंवर लाल जैसे कई लोग अपना काम छोड़कर बीकानेर आए हुए हैं। भंवर लाल अपना हैवी मोटर ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल करवाने गुजरात से आए थे, लेकिन मोबाइल अपडेट की त्रुटि और संबंधित अधिकारियों के अवकाश पर होने के कारण उनका काम नहीं हो सका। लंबी दूरी तय कर कार्यालय पहुँचने वाले इन आवेदकों को बिना समाधान के ही खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

प्रशासन को कराया अवगत, समाधान का इंतजार
बीकानेर बार एसोसिएशन के सदस्य एडवोकेट हनुमान प्रसाद शर्मा ने इस गंभीर अव्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी) और डीटीओ को इस तकनीकी बाधा से लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराते हुए जल्द समाधान की गुजारिश की है। शर्मा का कहना है कि एक तरफ प्रधानमंत्री जी का संकल्प हर कार्य को डिजिटल इंडिया से जोड़ना है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की उदासीनता और तकनीकी खामियों के कारण यह संकल्प विफल होता नजर आ रहा है।

सैकड़ों आवेदनों के लंबित होने से न केवल लोगों का समय और पैसा बर्बाद हो रहा है, बल्कि बिना वैध लाइसेंस के वाहन चलाने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर भी सता रहा है। अब देखना यह है कि परिवहन विभाग इस तकनीकी खामी को दूर कर आमजन को राहत कब तक प्रदान करता है।

 

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