एनआरसीसी ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत 1,650 से अधिक किसानों को किया जागरूक, सोशल मीडिया पर मिले 1.5 लाख से अधिक इम्प्रेशन

एनआरसीसी ने 'खेत बचाओ अभियान' के तहत 1,650 से अधिक किसानों को किया जागरूक
STBA 5 JUNE 2026
C M MUDRA MEMORIAL HOSPITAL
quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 1 जुलाई । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा भारत सरकार के ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत एक महीने तक चलाए गए व्यापक जन-जागरूकता अभियान का सफलतापूर्वक समापन हुआ। 1 से 30 जून 2026 तक संचालित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि, वैज्ञानिक उष्ट्र पालन तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना रहा। यह अभियान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट के मार्गदर्शन में एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया के नेतृत्व में आयोजित किया गया।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

अभियान के दौरान केन्द्र के वैज्ञानिकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों की टीमों ने बीकानेर जिले के लगभग 25 गांवों का सघन दौरा किया। इस दौरान टीमों ने कुल 1,658 किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया, जिनमें 1,066 पुरुष और 592 महिला किसान शामिल थीं। महीने भर चलीं किसान गोष्ठियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, वैज्ञानिक परामर्श और क्षेत्रीय प्रदर्शनों के माध्यम से ग्रामीणों को मृदा परीक्षण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक व प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और आधुनिक उष्ट्र पालन की महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। अभियान में महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उन्हें टिकाऊ आजीविका के प्रति प्रेरित किया गया।

pop ronak
M ranka bhajanlal cm

एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने इस अभियान की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए वैज्ञानिकों और तकनीकी स्टाफ के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान वैज्ञानिकों और काश्तकारों के बीच के जुड़ाव को मजबूत करते हैं, जिससे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के तकनीकी नवाचारों को खेतों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

अभियान के आयोजन सचिव डॉ. बी. श्रीशैलम ने बताया कि इस अवधि में विश्व पर्यावरण दिवस, पीएम-किसान लाइव कार्यक्रम तथा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर विशेष आयोजन किए गए। इन कार्यक्रमों से किसानों के साथ-साथ युवाओं, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भी जोड़ा गया। अभियान के दौरान जमीनी गतिविधियों के साथ-साथ डिजिटल तकनीक का भी प्रभावी उपयोग किया गया। सभी गतिविधियों और फील्ड रिपोर्टों को प्रतिदिन किसान सारथी पोर्टल सहित फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स (ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया गया, जिससे इस अभियान को करीब 1.59 लाख डिजिटल इम्प्रेशन प्राप्त हुए और इसकी पहुंच सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक व्यापक रूप से बनी।

sjps