शिवराज जी छंगाणी राजस्थानी मातृभाषा के सच्चे सपूत थे-राजेश रंगा

शिवराज जी छंगाणी राजस्थानी मातृभाषा के सच्चे सपूत थे
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बीकानेर, 02 मार्च। द पुष्करणाज फाउण्डेशन एवं राजस्थानी साफा पाग पगड़ी कला संस्कृति संस्थान व अर्जुन तीरंदाजी संस्थान द्वारा स्थानीय नत्थूसर गेट के बाहर सृजन सभागार में राजस्थानी भाषा कला, संस्कृति के पूर्व अध्यक्ष शिवराज जी छंगाणी के निधन पर श्रृंद्धाजलि सभा आयोजित की गई।
जिसमें द पुष्करणा फाउण्डेशन के अध्यक्ष राजेश रंगा ने बताया कि शिवराज जी छंगाणी पुष्करणा स्कूल के प्रधानाचार्य भी थे और राजस्थानी भाषा के सच्चे सपूत थे। उन्हांेने विभिन्न भाषाओं और साहित्यों में अच्छा योगदान रहा। उनसे तीन पीढ़ी तक छात्र/छात्राओं ने शिक्षा ग्रहण की। वे एक सच्चे समाज सुधारक थे।

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इसी क्रम में गोपीकिशन छंगाणी ने बताया कि शिवराज जी समाज के लिए विभूति थे उन्होंने कविताएं, साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाई थी। समाज को नई जागृति पैदा की। इसी क्रम में व्यवसायी राजकुमार रंगा ने बताया कि शिवराज जी से हमने शिक्षा ग्रहण की और आज भी हमारे प्रेरणा स्त्रोत रहे। हमें संस्कारित बनाया आज हमें छोड़कर दूसरी दुनिया में स्थान ले लिया भगवान उनको अपने चरणों में स्थान दें।

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इसी क्रम में कृष्णचन्द पुरोहित ने बताया कि श्री शिवराज जी छंगाणी हमेशा खेल, कला, शिक्षा, साहित्य और समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों को नई जीवन की प्रेरणा दी। साथ ही राजस्थानी मातृभाषा में वे पहले सपूत थे जिन्होंने राजस्थानी भाषा के लिए हमेशा साहित्यिक के क्षेत्र में अग्रणी रहे है। साथ ही खेल के क्षेत्र में भी उनका विशेष योगदान रहा है और कला और संस्कृति पर उनके कई आलेख समाज को संस्कृति से रूबरू करता है। इसी क्रम में मदन मोहन ओझा ने बताया कि शिवराज जी मेरे गुरू थे और मेरी पारिवारिक रिश्तेदारी थी आज वे समाज के अंदर हमेशा अपनो से बनाए रखते थे और हर परिवार से उनके पारिवारिक संबंध थे।
कार्यक्रम का संचालन आशिष रंगा ने किया इस अवसर पर प्रियंका व्यास, अविनाश व्यास, विजयगोपाल जी, उमेश जी, कार्तिक मोदी, आदित्य पुरोहित, मोहित पुरोहित, दिनेश व्यास, कृष्णकांत, भुवनेश पुरोहित, श्यामसुन्दर किराडू, उमेश पुरोहित, रामचन्द्र आचार्य इत्यादि उपस्थित थे।

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