दक्षिण मुंबई में आचार्यश्री तुलसी की मासिक पुण्यतिथि पर विशेष आयोजन
दक्षिण मुंबई में आचार्यश्री तुलसी की मासिक पुण्यतिथि पर विशेष आयोजन

- आत्मानुशासन का दिया प्रतिबोध
मुंबई, 28 अक्टूबर । कालबादेवी स्थित महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, दक्षिण मुंबई के तत्वावधान में आचार्यश्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या शासनश्री साध्वीश्री कंचनप्रभाजी, शासनश्री साध्वीश्री मंजूरेखाजी एवं सहवर्ती साध्वीवृंद के पावन सान्निध्य में गणाधिपति पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री तुलसी की मासिक पुण्यतिथि पूरी श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण में मनाई गई।


कार्यक्रम की शुरुआत साध्वीवृंद के मंगल मंत्रोच्चार के साथ हुई। इस अवसर पर साध्वीवृंद ने आचार्यश्री तुलसी के महान व्यक्तित्व, उनके कृतित्व, तेरापंथ संघ के विकास में उनके अमूल्य योगदान तथा अनुशासन और वात्सल्य के गहरे महत्व पर प्रकाश डाला।



साध्वीवृंद के प्रेरणादायी विचार
शासनश्री साध्वीश्री कंचनप्रभाजी ने अपने संबोधन में कहा, “इतिहास का हर पन्ना पूज्य गणाधिपति के उपकारों से उपकृत है। उन्होंने साधु-साध्वियों के साथ-साथ श्रावक-श्राविकाओं की चेतना को भी जागृत किया। तेरापंथ समाज उनके विकास के योगदान को कभी नहीं भूल सकता।”
शासनश्री साध्वीश्री मंजूरेखाजी ने कहा, “गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी ने संघ में विकास के नए द्वार खोले और सभी आचार्यों का साहित्य सृजन कर तेरापंथ की नींव को सुदृढ़ किया। आज चारों ओर जो उपलब्धियां नजर आ रही हैं, उनका मुख्य आधार अनुशासन और वात्सल्य ही है। उनकी संयम यात्रा से लाखों लोगों ने जीवन का मार्गदर्शन प्राप्त किया है।”
इस गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान साध्वीश्री उदितप्रभाजी, साध्वीश्री निर्भयप्रभाजी और साध्वीश्री चेलनाश्रीजी ने भी अपने विचार साझा किए। वहीं, दक्षिण मुंबई सभा के उपाध्यक्ष दिनेश धाकड़ ने एक सुमधुर गीत की प्रस्तुति देकर पूरे परिवेश को भक्तिमय बना दिया।
इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में विशिष्ट श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। सभी ने आचार्यश्री तुलसी के महान अवदानों का स्मरण करते हुए उनके आदर्शों, अनुशासन और आध्यात्मिक प्रेरणाओं को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में यह जानकारी सभा के मीडिया प्रभारी नितेश धाकड़ एवं तेयुप दक्षिण मुंबई के उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया द्वारा दी गई।

