पीबीएम अस्पताल में टेंडर घोटाला ? 27 करोड़ के रिकॉर्ड जब्त कर जयपुर लौटी जांच टीम, चहेती फर्मों को लाभ पहुँचाने का आरोप
पीबीएम अस्पताल में टेंडर घोटाला


बीकानेर, 3 मई। बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज और पीबीएम अस्पताल में मैन पावर आपूर्ति के ठेकों में हुई कथित भारी अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की वित्तीय सलाहकार (FA) दीपा गुप्ता और AAO प्रथम जयराम मीणा की उच्च स्तरीय टीम पीबीएम अस्पताल के महत्वपूर्ण दस्तावेज और टेंडर फाइलें अपने साथ जयपुर ले गई है। अब इन दस्तावेजों की विस्तृत स्क्रूटनी निदेशालय स्तर पर की जाएगी।


पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह की शिकायत पर एक्शन
इस पूरी कार्रवाई की नींव पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह जसोल की शिकायत पर पड़ी। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मेडिकल कॉलेज और पीबीएम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के अनुसार बिना टेंडर या मनमाने नियम-शर्तें बनाकर खास फर्मों को लाभ पहुँचाया गया। अनुमोदन और कार्यादेश जारी करने में वित्तीय नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष छैलूसिंह ने इस संबंध में मानवेंद्र सिंह को परिवाद सौंपकर जांच की मांग की थी।


27 करोड़ के ठेके और ‘पन्नाधाय सिक्योरिटी’ का दबदबा
- जांच के घेरे में इस साल हुए करीब 27 करोड़ रुपये के मैन पावर ठेके हैं।
- 19 करोड़ का ठेका: वार्ड बॉय और सुरक्षा व्यवस्था का भारी-भरकम ठेका अकेले ‘मैसर्स पन्नाधाय सिक्योरिटी’ को दिया गया है।
- 6 करोड़ का सफाई ठेका: इसमें भी चहेती फर्मों के लिए नियम बदलने के आरोप हैं।
- कंप्यूटर ऑपरेटर: 2 करोड़ के पुराने ठेके को एक साल से लगातार एक्सटेंशन दिया जा रहा है, जिससे नई टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
प्रशासन की चुप्पी ने बढ़ाया संदेह
जांच दल के बीकानेर पहुँचने और रिकॉर्ड जब्त करने के बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल, पीबीएम अधीक्षक और लेखा शाखा के अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। अधिकारियों द्वारा जांच दल के सदस्यों के नाम बताने तक से गुरेज करना और फोन ‘नो रिप्लाई’ रखना कई सवाल खड़े कर रहा है। माना जा रहा है कि जयपुर में होने वाली इस सूक्ष्म जांच के बाद पीबीएम अस्पताल के कई बड़े अधिकारियों और ठेका फर्मों की मिलीभगत का बड़ा खुलासा हो सकता है।

