मनुस्मृति विद्वत् विचार गोष्ठी के प्रथम दिन वर्ण व्यवस्था एवं नारी स्वतंत्रता पर गहन मंथन

मनुस्मृति विद्वत् विचार गोष्ठी के प्रथम दिन वर्ण व्यवस्था एवं नारी स्वतंत्रता पर गहन मंथन
quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 03 अक्टूबर । शिक्षाविद एवं समाजसेवी स्वर्गीय रामनारायण स्वामी की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् विचार गोष्ठी के प्रथम दिन शनिवार को होटल पाणिग्रहण में दो विचारोत्तेजक सत्रों का आयोजन किया गया। उद्घाटन एवं परिचय के साथ शुरू हुई इस परिचर्चा में देश भर से पधारे शास्त्रों के ज्ञाता, विषय विशेषज्ञों एवं विद्वानों ने मनुस्मृति, वर्ण व्यवस्था तथा नारी स्वतंत्रता जैसे विषयों पर संतुलित, प्रामाणिक एवं तथ्यात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

दो सत्रों में हुआ विद्वानों का वैचारिक मंथन

pop ronak

प्रथम सत्र: फरीदाबाद से पधारे आचार्य डॉ. निरंजनलाल मंगल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।

द्वितीय सत्र: कन्या गुरुकुल रोजड़ से पधारीं आचार्य शीतल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

देशभर के ख्यातिप्राप्त विद्वानों ने रखे विचार

गोष्ठी में मनुस्मृति के विशेषांक के लेखक डॉ. सुरेंद्र कुमार (गुरुग्राम) सहित रोजड़ के डॉ. दीपक आर्य, कानपुर के उत्कर्ष आर्य, इलाहाबाद के डॉ. प्रेम शंकर सिंह, बीएचयू बनारस के डॉ. शिवलोचन शांडिल्य, हमीरपुर के आचार्य रविंद्र, हैदराबाद के आचार्य हरिप्रसाद, फलोदी के केसरमल तथा बीकानेर के डॉ. चंचल पाठक, डॉ. नंदिता सिंघवी एवं नीरज श्रीवास्तव ने मनुस्मृति के पक्ष और विपक्ष में प्रमाण सहित अपने विचार प्रस्तुत किए। सत्र के दौरान उपस्थित प्रबुद्ध श्रोताओं ने अपनी शंकाओं का समाधान प्रश्नोत्तर के माध्यम से किया।

वर्ण व्यवस्था, दंड नीति और स्त्री-पुरुष की भूमिकाओं पर विवेचन

वक्ताओं ने मनुस्मृति के आलोक में मुख्य रूप से वर्ण व्यवस्था, दंड विधान, झूठी गवाही तथा अपराध के विविध संदर्भों पर मुखर रूप से विचार व्यक्त किए। विद्वानों ने स्पष्ट किया कि प्राचीन काल में मनुस्मृति जिन सामाजिक परिस्थितियों में सामने आई, उस समय समाज की संरचना, परिवार व्यवस्था, शिक्षा, न्याय व्यवस्था और स्त्री-पुरुष की सामाजिक भूमिकाएं आज के युग से सर्वथा भिन्न थीं। ऐसे में तत्कालीन सामाजिक नियमों को वर्तमान में लागू करने से पूर्व यह देखना अत्यंत आवश्यक है कि वे आज की सामाजिक आवश्यकताओं और आधुनिक न्यायपरक दृष्टि के अनुकूल हैं या नहीं।

मधुर भजनों से हुआ प्रथम दिन का समापन

कार्यक्रम के अंत में भजन व सत्संग सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें गायक आर्य उत्तम जी ने अपनी मधुर स्वर लहरियों से भजनों की प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।