डीएल टेस्ट के नए ट्रैक सिस्टम के विरोध में उतरे यातायात अधिवक्ता, डीटीओ को सौंपा ज्ञापन
डीएल टेस्ट के नए ट्रैक सिस्टम के विरोध में उतरे यातायात अधिवक्ता, डीटीओ को सौंपा ज्ञापन


- पिकअप कैंपर व लाइट मोटर व्हीकल्स के लिए संकरे ट्रैक को बताया व्यावहारिक, विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग
बीकानेर, 3 जुलाई । यातायात अधिवक्ता संगठन के एक शिष्टमंडल ने ड्राइविंग लाइसेंस परीक्षण (डीएल टेस्ट) के लिए प्रस्तावित नई ट्रैक प्रणाली के विरोध में जिला परिवहन कार्यालय पहुंचकर जिला परिवहन अधिकारी (DTO) संजीव चौधरी को क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) एवं जिला प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा. इस शिष्टमंडल का नेतृत्व संगठन के संयोजक एवं राजस्थान उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट हनुमान प्रसाद शर्मा ने किया.


सौंपे गए ज्ञापन में प्रमुखता से मांग की गई है कि ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट के लिए प्रस्तावित ट्रैक प्रणाली को जल्दबाजी में लागू करने से बचा जाए. इसे धरातल पर उतारने से पहले पिकअप कैंपर एवं अन्य हल्के मोटर वाहनों (LMV) का वास्तविक और व्यावहारिक परिस्थितियों में विस्तृत परीक्षण कराया जाना बेहद आवश्यक है. इसके साथ ही, ट्रैक की चौड़ाई, घुमाव (टर्निंग रेडियस), ढाल, मोड़ एवं अन्य तकनीकी मानकों का विषय विशेषज्ञों से वैज्ञानिक परीक्षण कराकर इसमें जरूरी संशोधन किए जाएं, ताकि आमजन को परेशानी न हो.


यातायात अधिवक्ताओं ने बीकानेर की भौगोलिक स्थिति का हवाला देते हुए ज्ञापन में कहा कि जिले का अधिकांश क्षेत्र ग्रामीण है, जहां पिकअप कैंपर और इसी श्रेणी के अन्य हल्के मोटर वाहन ही कृषि, पशुपालन, स्थानीय व्यापार तथा माल परिवहन का मुख्य जरिया हैं. वर्तमान में तैयार किए गए ट्रैक की संकरित संरचना विशेष रूप से पांच सीट से अधिक क्षमता वाले कमर्शियल हल्के मोटर वाहनों एवं पिकअप कैंपर के लिए बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है. संकरे घुमाव और बेहद सीमित स्थान होने के कारण अच्छे-खासे अनुभवी और प्रशिक्षित चालक भी तकनीकी खामियों की वजह से इस टेस्ट में फेल हो सकते हैं. इससे आवेदकों को अनावश्यक आर्थिक, सामाजिक एवं मानसिक परेशानी झेलनी पड़ेगी और साथ ही ऐसे संकुचित ट्रैक पर टेस्ट के दौरान सुरक्षा संबंधी जोखिम और दुर्घटना की आशंका भी बढ़ सकती है.
संगठन ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की तकनीकी रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही इस नई ट्रैक प्रणाली को अंतिम रूप से लागू किया जाए. इस पूरी समीक्षा और परीक्षण प्रक्रिया में केवल अधिकारी ही नहीं, बल्कि विभिन्न परिवहन संगठनों, वाहन स्वामियों, अनुभवी ड्राइवरों एवं ऑटोमोबाइल तकनीकी विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर एक निष्पक्ष और सुरक्षित व्यवस्था विकसित हो सके. संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक यह ट्रैक सभी श्रेणी के हल्के मोटर वाहनों के लिए सुरक्षित और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप प्रमाणित नहीं हो जाता, तब तक इसके उपयोग पर रोक रहनी चाहिए.
शिष्टमंडल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बिना समुचित और जमीनी परीक्षण के इस जटिल ट्रैक प्रणाली को थोपने से ग्रामीण क्षेत्र के हजारों वाहन स्वामियों, चालकों एवं उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा संकट आ सकता है. इसलिए जनहित, सड़क सुरक्षा तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तकनीकी सुधार के बाद ही इस नई व्यवस्था को लागू किया जाना न्यायसंगत होगा. इस दौरान ज्ञापन सौंपने वाले शिष्टमंडल में संयोजक एडवोकेट हनुमान प्रसाद शर्मा के साथ एडवोकेट सुरेंद्र विश्नोई, एडवोकेट बनवारी लाल, एडवोकेट धीरज सिडाना, एडवोकेट शिव कुमार, एडवोकेट प्रेम विश्नोई सहित यातायात अधिवक्ता संगठन के अनेक सदस्य और पदाधिकारी उपस्थित रहे.


