लोकायुक्त की बड़ी स्ट्राइक- 27 लाख के मुआवजे के बदले मांग रहा था 50% रिश्वत; रंगे हाथों पकड़ा गया भू-अर्जन अधिकारी
लोकायुक्त की बड़ी स्ट्राइक


रीवा/सतना, 27 फरवरी। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत लोकायुक्त रीवा की टीम ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे की राशि जारी करने के बदले 50 प्रतिशत कमीशन की मांग करने वाले सहायक परियोजना भू-अर्जन अधिकारी भूपेन्द्र पांडेय को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई भू-अर्जन शाखा कार्यालय में उस समय हुई जब अधिकारी रिश्वत की अगली किस्त ले रहा था।


27 लाख के बदले 13.5 लाख की मांग: किसान की शिकायत पर बिछाया जाल
मामले का खुलासा तब हुआ जब सदला निवासी शिव बहोर तिवारी ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई।


अधिग्रहण का मामला: पीड़ित की भूमि एनएच फोरलेन सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत अधिग्रहित की गई थी, जिसके एवज में उसे 27 लाख रुपये का मुआवजा मिलना तय हुआ था।
आधा हिस्सा मांगा: आरोपी अधिकारी भूपेन्द्र पांडेय ने मुआवजा राशि दिलवाने के बदले कुल राशि का 50 प्रतिशत यानी साढ़े तेरह लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।
ट्रैप की कार्यवाही: शिकायत के अनुसार, आरोपी एक लाख रुपये पहले ही एडवांस ले चुका था। गुरुवार को जैसे ही पीड़ित ने दूसरी किस्त के तौर पर एक लाख रुपये अधिकारी को सौंपे, पहले से तैनात लोकायुक्त की टीम ने उसे दबोच लिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
लोकायुक्त टीआई एस. आर. मरावी ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत के सत्यापन के बाद योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया गया था।
रंगे हाथों गिरफ्तारी: पकड़े जाने के बाद आरोपी अधिकारी के हाथ धुलवाए गए, तो वे गुलाबी हो गए, जो रिश्वत लेने का वैज्ञानिक प्रमाण है।
कानूनी कार्रवाई: आरोपित अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। विभाग अब आरोपी के अन्य चल-अचल संपत्तियों और पुराने फाइलों की भी जांच कर रहा है ताकि भ्रष्टाचार के अन्य मामलों का पता लगाया जा सके।
