सृजन की निरंतरता ही बनाती है रचना को अविस्मरणीय’ — बुलाकी शर्मा

सृजन की निरंतरता ही बनाती है रचना को अविस्मरणीय' — बुलाकी शर्मा
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quicjZaps 15 sept 2025
  • अजित फाउण्डेशन में पुस्तक समीक्षा संगोष्ठी

बीकानेर, 29 मार्च 2026। अजित फाउण्डेशन द्वारा आयोजित पुस्तक समीक्षा कार्यक्रम की अध्यक्ष्यता करते हुए व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि लेखन करते हुए हमें किसी विशेष विद्या हेतु बंधकर नहीं लिखना चाहिए हमें सभी विधाओं में अपना सृजन करना चाहिए। निरन्तर सृजन करते रहने से ही उसमें कुछ अविस्मरणीय रचनाएं लिखी जाती है जोकि पाठकों के मन को छूती है। बुलाकी शर्मा ने कहा कि हमें श्रोताओं के साथ-साथ अच्छा पाठक भी बनना जरूरी है। उन्होंने वैद्य विधासागर पंचारिया के रचना संसार पर बोलते हुए कहा कि इन्होंने विपरित परिस्थतियों में लिखना आरम्भ किया तथा अध्यात्म, साहित्यिक, काव्य एवं कथा सभी विद्याओं पर अनवरत अपनी लेखनी चलाई।

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सृजन की निरंतरता ही बनाती है रचना को अविस्मरणीय’ — बुलाकी शर्मा

वैद्य विद्यासागर पंचारिया के रचना संसार पर चर्चा
पुस्तक के लेखक वैद्य विद्यासागर पंचारिया ने अपनी साहित्यिक यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने काव्य में लिखना आरम्भ किया फिर उनका झुकाव आध्यात्म की ओर रहा। उन्होंने कविता खण्ड, कहानियां, भागवत वांगमय, कृष्ण के कर्मयोग आदि कई विषयों पर लगभग 24 पुस्तके लिखी जोकि आज प्रकाषित है। विद्यासागर ने कहा कि उनके लेखन में मन की स्थितियां एवं भावों को संवेदनाओं के साथ रचाव किया है।
पुस्तक समीक्षक के रूप में वैद्य विद्यासागर पंचारिया द्वारा कृत ‘प्रेम में समर्पण’ पुस्तक पर हिन्दी एवं राजस्थानी की मूर्धन्य कवयित्री डॉ. कृष्णा आचार्य ने कहा कि लेखक ने अपनी पुस्तक में वेदों से लेकर लोक तक प्रेम के आख्यानों पर रचनाएं लिखी है। उन्होंने अपनी रचनाओं में बताया है कि प्रेम की कोई सीमाएं नहीं होती है, प्रेम क्या है ?, प्रेम क्यों है ? पर लेखक नहीं मुखरित होकर लिखा है।

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इसी क्रम में साहित्यकार एवं कवि जुगल किशोर पुरोहित ने पंचारिया की ‘सूर्य रथ रूके नहीं’ पुस्तक पर बोलते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो कि पूरे जगत एवं सभी के मन को आलौकित करता है। लेखक ने कहानियों के माध्यम से जीवन की सत्यता पर प्रकाश डाला तथा विभिन्न प्रसंगों के द्वारा नारी मर्म एवं समाज की विषमताओं की ओर इशारा किया है।

साहित्य और समाज सेवा का संगम
कार्यक्रम के शुरूआत में संस्था समन्वयक संजय श्रीमाली ने कहा कि पुस्तक समीक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जिसमें हम पुस्तक पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत कर सकते है। लेखक के रचना संसार पर अपनी अभिव्यक्ति देकर भविष्य के लेखन की ओर सावधानियों के बारे में बता सकते है।
समाजसेवी रमेश शर्मा ने कहा कि वैद्य विद्यासागर पंचारिया साहित्यकार के साथ-साथ एक अच्छे चिकित्सक हैं । उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में रहते हुए समाजहित के कई कार्यक्रम किए तथा अकाल के समय इन्होंने सरकार को भी अपनी लेखनी से ध्यानाकर्षण कर बहुत महत्ती के कार्य किए हैं ।
कार्यक्रम के अंत में गोविन्द जोशी ने संस्था की ओर से आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया तथा इस तरह के आयोजनों की सफलता हेतु सबके सहयोग की बात की।

कार्यक्रम में रमेश शर्मा, मो. फारूक, योगेन्द्र पुरोहित, इसरार हसन कादरी, नरसिंह बिन्नाणी, शिव दाधीच, दीक्षा व्यास, मनन श्रीमाली, उषा बिस्सा, महेष उपाध्याय, सुमित, प्रेम नारायण व्यास, आनन्द छंगाणी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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