इबोला के सबसे खतरनाक वेरिएंट से तबाही, 88 की मौत; बिना वैक्सीन वाले इस वायरस पर WHO का बड़ा अलर्ट

इबोला के सबसे खतरनाक वेरिएंट से तबाही, 88 की मौत
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नई दिल्ली, 17 मई। कोरोना महामारी के बाद अब दुनिया पर एक और घातक वायरस का खतरा मंडराने लगा है। अफ्रीकी देशों, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस के सबसे दुर्लभ और खतरनाक स्ट्रेन ‘बुंडीबुग्यो’ ने भारी तबाही मचाई है। इस जानलेवा वायरस की चपेट में आने से अब तक 88 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से अधिक लोग संक्रमित बताए जा रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इसे ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न’ (PHEIC) यानी ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। कोविड-19 के बाद यह पहली बार है जब WHO ने किसी वायरस को लेकर इस स्तर की वैश्विक आपातकाल की घोषणा की है।

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WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने औपचारिक बैठक से पहले ही रविवार को इसे ग्लोबल इमरजेंसी घोषित करने का बड़ा फैसला लिया, जो यह दर्शाता है कि वायरस के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का खतरा बेहद गंभीर हो चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संघर्ष प्रभावित इलाकों में जांच और रिपोर्टिंग बेहद चुनौतीपूर्ण होने के कारण वास्तविक मृतकों और संक्रमितों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है। कई मरीज तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। इबोला का यह बुंडीबुग्यो स्ट्रेन इसलिए भी सबसे ज्यादा खौफनाक माना जा रहा है क्योंकि वर्तमान में इसके खिलाफ कोई प्रभावी वैक्सीन, विशिष्ट इलाज या टेस्ट उपलब्ध नहीं है।

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यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, पसीने, लार और अन्य बॉडी फ्लूइड्स के सीधे संपर्क में आने से फैलता है और इंसानों के साथ-साथ जानवरों को भी अपनी चपेट में ले सकता है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जिनमें तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। हालांकि, संक्रमण बढ़ने पर मरीज को उल्टी, दस्त और शरीर के अंदरूनी व बाहरी हिस्सों से ब्लीडिंग (रक्तस्राव) होने लगती है, जिसके कारण इसे ‘ब्लीडिंग फीवर’ भी कहा जाता है। संक्रमण के लक्षण 2 से 21 दिनों के भीतर सामने आते हैं, और समय पर इलाज न मिलने से 30 से 40% मरीजों की मौत निश्चित मानी जाती है।

राहत की बात यह है कि WHO ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह स्थिति पूरी तरह महामारी (Pandemic) की श्रेणी में नहीं आई है। ग्लोबल इमरजेंसी घोषित करने का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसाधनों और वित्तीय सहायता को तेजी से जुटाना है। अफ्रीका CDC के महानिदेशक डॉ. जीन कसेया के अनुसार, संक्रमण के मूल स्रोत का अभी तक पता नहीं चल पाया है, जिससे वायरस को फैलने का मौका मिल गया। युगांडा में मिले संक्रमित मरीज हाल ही में कॉन्गो की यात्रा से लौटे थे, जिसने अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के जरिए इस वायरस के दूसरे देशों में फैलने के खतरे को और बढ़ा दिया है। फिलहाल संक्रमितों को आइसोलेशन में रखने और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की सख्त सलाह दी जा रही है।

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