सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के उपयोग को लेकर केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब, सिर्फ ‘पहचान पत्र’ के रूप में सीमित करने पर विचार

सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के उपयोग को लेकर केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब, सिर्फ 'पहचान पत्र' के रूप में सीमित करने पर विचार
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नई दिल्ली, 17 जून। सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के व्यापक और अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत में दाखिल इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि देश में आधार कार्ड का उपयोग नागरिकता, मूल निवास और पते के कानूनी सबूत के तौर पर गलत तरीके से किया जा रहा है, जो कि इसके मूल वैधानिक स्वरूप के विपरीत है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों से उनका रुख पूछा है।

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याचिका में की गई मुख्य मांगें: केवल ‘पहचान की पुष्टि’ तक सीमित हो आधार
यह महत्वपूर्ण याचिका प्रसिद्ध वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा कोर्ट में दाखिल की गई है। याचिका में शीर्ष अदालत से यह मांग की गई है कि वह केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सभी प्रशासनिक निकायों और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को कड़े दिशा-निर्देश जारी करे।

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कानूनी सीमाएं तय करने की मांग: याचिका में पुरजोर वकालत की गई है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि आधार कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ ‘पहचान की पुष्टि’ (Identity Verification) के लिए एक डिजिटल माध्यम के रूप में हो।

प्रमाण के रूप में अमान्य करने का आग्रह: इसे किसी भी व्यक्ति या नागरिक की राष्ट्रीयता (नागरिकता), मूल निवास (डोमिसाइल), स्थायी पते या जन्म तिथि के अकाट्य कानूनी प्रमाण के रूप में पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने दिया आधार अधिनियम और UIDAI की अधिसूचना का हवाला
अपनी दलीलों को मजबूती से कोर्ट के सामने रखते हुए याचिकाकर्ता ने दो प्रमुख कानूनी दस्तावेजों और अधिनियमों का हवाला दिया है:

आधार अधिनियम की धारा 9: याचिका में स्पष्ट किया गया है कि खुद मूल ‘आधार अधिनियम’ की धारा 9 में यह साफ शब्दों में दर्ज है कि आधार कार्ड को नागरिकता या मूल निवास का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

UIDAI की 2023 की अधिसूचना: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा 22 अगस्त 2023 को जारी एक आधिकारिक अधिसूचना का उल्लेख करते हुए बताया गया कि प्राधिकरण ने स्वयं यह स्पष्ट कर दिया था कि आधार केवल एक विशिष्ट पहचान पत्र है। इसे पते, नागरिकता या जन्मतिथि के साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

क्यों महत्वपूर्ण है सुप्रीम कोर्ट का यह रुख?
दस्तावेजों की स्वीकार्यता पर पड़ेगा बड़ा असर: वर्तमान में देश के भीतर लगभग सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी और निजी संस्थानों (जैसे बैंक खाता खुलवाने, सिम कार्ड लेने या अन्य नागरिक सेवाओं) में आधार कार्ड को पते और जन्मतिथि के प्राथमिक दस्तावेज के रूप में धड़ल्ले से स्वीकार किया जाता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुरू की गई इस विधिक समीक्षा के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। इस ऐतिहासिक मामले के बाद अब यह पूरी तरह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भविष्य में आधार कार्ड की कानूनी सीमाएं क्या होंगी और विभिन्न नागरिक सेवाओं में इसकी स्वीकार्यता का दायरा कितना सीमित होगा।

 

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