श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर के तत्वाधान में लोगस्स कल्प अनुष्ठान का आयोजन; साध्वी त्रिशलाकुमारी जी का मिला सानिध्य
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर के तत्वाधान में लोगस्स कल्प अनुष्ठान का आयोजन


गंगाशहर, 09 अगस्त । श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के तत्वाधान में पूज्य साध्वी त्रिशलाकुमारी जी के पावन सानिध्य में “लोगस्स कल्प अनुष्ठान” का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर मंत्रोचार और जप-तप में उत्साहपूर्वक भाग लिया।


अनुष्ठान के अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए साध्वी श्री त्रिशलाकुमारी जी ने कहा कि वर्तमान समय में हर व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहा है। कर्मशास्त्र की दृष्टि से जीवन में आने वाली इन सभी समस्याओं का मूल कारण हमारे अशुभ कर्मों का उदय होना है। अशुभ कर्मों के प्रभाव को क्षीण करने और उनसे मुक्ति पाने का एकमात्र मार्ग अध्यात्म है। हमारे तीर्थंकरों, गणधरों और आचार्यों ने ऐसे शक्तिशाली मंत्रों व तंत्रों की रचना की है, जिनके माध्यम से न केवल संकटों से मुक्ति मिलती है बल्कि व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनता है।



लोगस्स कल्पवृक्ष और चिंतामणि रत्न के समान
साध्वीश्री ने लोगस्स पाठ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में लोगस्स हमारे लिए कल्पवृक्ष और चिंतामणि रत्न के समान है। इसमें चौबीस तीर्थंकरों की भावपूर्ण स्तुति की गई है। इसके नियमित और निष्ठापूर्वक पाठ से अशुभ कर्मों का क्षय तो होता ही है, साथ ही आसपास की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और वातावरण पूरी तरह शुद्ध व पवित्र बनता है। उन्होंने बल दिया कि किसी भी अनुष्ठान की सफलता दृढ़ आस्था और अटूट विश्वास पर निर्भर करती है। साध्वीश्रीजी ने अत्यंत सुव्यवस्थित एवं आध्यात्मिक विधि से अनुष्ठान संपन्न करवाया, जिससे पूरा परिसर मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।
गंगाशहर में बढ़ रहा तप-जप का प्रभाव, 23 दिनों से प्रवर्धमान है संथारा
सभा मंत्री जतनलाल संचेती ने बताया कि गंगाशहर में साध्वीश्री जी के सानिध्य में तप और जप की अविरल धारा बह रही है। इसी क्रम में संघ प्रभावक संथारे के अंतर्गत श्रीमती कौशल्यादेवी चोपड़ा का संथारा गतिमान है, जो आज 23वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इससे पूरे जैन समाज में धर्म और शासन की व्यापक प्रभावना हो रही है। आयोजन को सफल बनाने में तेरापंथ सभा, तेरापंथ युवक परिषद एवं तेरापंथ महिला मंडल की सक्रिय सहभागिता रही। मुनिश्री अमृतकुमार जी एवं सहवर्ती सभी तीनों संतों का प्रवास बोथरा भवन में है तथा मुनिश्री प्रवचन देने प्रतिदिन तेरापंथ भवन भीनासर पधारते हैं।


