ज्ञानेश कुमार को दिया 48 घंटे में इस्तीफे का अल्टीमेटम
ज्ञानेश कुमार को दिया 48 घंटे में इस्तीफे का अल्टीमेटम




- मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी का मोर्चा
नई दिल्ली, 24 सितंबर। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर देश में चल रहा राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है। गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोही होने का आरोप लगाते हुए उनसे 48 घंटे के भीतर पद छोड़ने की मांग की है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि इस्तीफा न मिलने की स्थिति में देशव्यापी आंदोलन और दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।


दिल्ली में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के नाम पर देशभर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जो आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। दीपके ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद केंद्र सरकार अपनी स्थिति को लेकर आशंकित है और इसी वजह से विपक्षी दलों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में वोट हटाने की रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में क्षेत्रीय नेतृत्व को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।


यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान मतदाता सूची संशोधन, Form-6 में बदलाव और डेटा बेस के केंद्रीकरण जैसे नीतिगत निर्णयों पर कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच दर्ज कराई गई इन आपत्तियों में कई बदलावों को नियमों के विपरीत और आवेदकों के लिए परेशानी खड़ा करने वाला बताया गया था।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन सभी आरोपों और दावों को खारिज करते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग का कहना है कि एक बहुसदस्यीय निकाय में किसी भी नीतिगत फैसले से पूर्व सदस्यों के बीच विचार-विमर्श, सवाल और सुझाव आना एक स्वाभाविक और स्वस्थ प्रशासनिक प्रक्रिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR समेत सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं और ‘ECINet’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पूरी तरह सुरक्षित डेटा प्रोटोकॉल के तहत काम कर रहे हैं। आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले एक वर्ष के दौरान कई राज्यों में निष्पक्ष चुनाव और प्रशासनिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई हैं।
