अध्यात्म साधना का प्रथम सोपान है सामायिक- शासन श्री साध्वी मंजुप्रभा जी

अध्यात्म साधना का प्रथम सोपान है सामायिक- शासन श्री साध्वी मंजुप्रभा जी
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  • तुलसी साधना केंद्र में मनाया गया सामायिक दिवस

बीकानेर ,10 सितंबर । रामपुरिया मार्ग स्थित तुलसी साधना केंद्र में जैन श्वेतांबर तेरापंथ संघ के युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासन श्री साध्वीश्री मंजुप्रभा जी के पावन सान्निध्य में पर्युषण महापर्व का तीसरा दिन ‘अभिनव सामायिक दिवस’ के रूप में आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने एक साथ अभिनव सामायिक की साधना कर कर्मों की निर्जरा की।

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साध्वीवृंद का पावन बोध एवं प्रेरक प्रसंग
शासन श्री साध्वी मंजुप्रभा जी: उन्होंने सामायिक के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सामायिक अध्यात्म साधना का प्रथम सोपान है, जो साधक को बहिर्मुखी वृत्तियों से हटाकर अंतर्मुखी बनाती है। जीवन में समता की साधना परम आवश्यक है। प्रभु महावीर की भव परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी आत्मा का ऊर्ध्वारोहण नयसार के भव से प्रारंभ हुआ था, जहां सेवा, पात्रदान और प्रवचन श्रवण से पहली बार सम्यक्त्व की प्राप्ति हुई। वही जीव मरीचि के रूप में अवसर्पिणी काल के अंतिम तीर्थंकर, प्रथम वासुदेव और चक्रवर्ती बनने का मार्ग प्रशस्त कर सका।

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साध्वी गुरुयशा जी: उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को अभिनव सामायिक का सुव्यवस्थित प्रयोग करवाया। अपने उद्बोधन में मृगालोढ़ा की भव परंपरा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सघन अशुभ कर्मों के उदय का प्रभाव निकटवर्ती व्यक्तियों पर भी पड़ता है।

साध्वी जयंतप्रभा जी: सामायिक दिवस पर अपनी कविता प्रस्तुत करते हुए उन्होंने सजग किया कि आधुनिक युग में सामायिक की मर्यादाओं को आधुनिक न बनाएं। सावद्य (पापयुक्त) कार्यों का त्याग कर की गई सामायिक ही नए पाप कर्मों के बंध को रोकती है।

श्रावक निष्ठापत्र का वाचन एवं सामूहिक साधना
कार्यक्रम के दौरान निवर्तमान अध्यक्ष सुरपत बोथरा ने ‘श्रावक निष्ठापत्र’ का वाचन किया और सभी श्रद्धालुओं को जैन जीवन शैली व संघ निष्ठा के प्रति जागरूक किया। तुलसी साधना केंद्र में आयोजित इस अभिनव सामायिक उपक्रम में बीकानेर के जैन समाज ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर धर्माराधना की।

 

 

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