राजराजेश्वरी नगर में उपासक एवं ज्ञानशाला प्रशिक्षण शिविर आयोजित

राजराजेश्वरी नगर में उपासक एवं ज्ञानशाला प्रशिक्षण शिविर आयोजित
STBA 5 JUNE 2026
quicjZaps 15 sept 2025
खमत खामणा
  • मुनिश्री आकाश कुमार ने बताया संस्कारों का महत्व

बेंगलुरु/राजराजेश्वरी नगर, 27 सितम्बर । राजराजेश्वरी नगर स्थित तेरापंथ भवन में शनिवार (25 सितम्बर) को ज्ञानशाला प्राध्यापक डालिमचंद नवलखा की महनीय उपस्थिति में ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं की बच्चों के विकास में भूमिका विषय पर प्रशिक्षण शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर में कर्नाटक क्षेत्र के विभिन्न आंचलों से बड़ी संख्या में ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं एवं उपासकों ने सहभागिता की।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

कार्यक्रम में मुनिश्री आकाश कुमार जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए फरमाया कि शास्त्रों में ज्ञान की महत्ता का विस्तार से वर्णन है और जो ज्ञान बांटने का पावन कार्य करते हैं, उनका स्थान अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाएं समाज की नई पीढ़ी को अपने अमूल्य समय और श्रम से संस्कारों का सिंचन दे रही हैं।

pop ronak

मुनि हितेन्द्र कुमार जी ने ज्ञानशाला शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि ज्ञानशाला का अर्थ ज्ञानवान बनने के साथ-साथ नम्रता, शालीनता और लाजवाब व्यक्तित्व के विकास से है। यहाँ केवल किताबी शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और संस्कारों का पोषण भी मिलता है। प्राध्यापक डालिमचंद नवलखा ने बताया कि देश-विदेश में 300 से अधिक ज्ञानशालाएं संचालित हो रही हैं और 800 से अधिक उपासक-उपासिकाएं धर्म प्रभावना के कार्य में जुटे हुए हैं।

समारोह में सभाध्यक्ष कमलसिंह दुगड़ ने सभी का आभार व्यक्त किया और ज्ञानशाला गतिविधियों को और अधिक व्यवस्थित रूप से चलाने की प्रतिबद्धता दोहराई। पूर्व संयोजिका श्रीमती प्रिया छाजेड़ ने भी अपने विचार रखे।

वर्तमान में ज्ञानशाला संयोजिका श्रीमती नीतू बाफना के कुशल निर्देशन में 7 प्रशिक्षिकाएं और 6 सहयोगी बहनें निस्वार्थ सेवाएं दे रही हैं। इसके अलावा उपासक प्रकल्प के तहत 2 भाई एवं 6 बहनें अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। अंत में सभा उपाध्यक्ष गुलाब बांठिया ने सुमधुर गीतिका के साथ आभार व्यक्त किया।