गुरु वल्लभ की पुण्यतिथि पर अष्टप्रकारी पूजा में गूंजे भक्ति के स्वर
गुरु वल्लभ की पुण्यतिथि पर अष्टप्रकारी पूजा में गूंजे भक्ति के स्वर

- 72 दीप प्रज्ज्वलित कर दी गई श्रद्धांजलि; 7 अक्टूबर को होगा उवसग्गहरं स्तोत्र का सामूहिक पूजन-पाठ
बीकानेर, 06 अक्टूबर । रांगड़ी चौक स्थित पौषधशाला में तपागच्छीय गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरिश्वरजी महाराज साहेब की आज्ञानुवर्तिनी साध्वीश्री प्रीतिरत्ना, साध्वीश्री प्रीतिसुधा एवं साध्वीश्री प्रीतियशा आदि ठाणा-3 की पावन निश्रा में पंजाब केसरी आचार्य विजय वल्लभ सूरिश्वरजी महाराज की 72वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। इस अवसर पर करीब तीन घंटे तक संगीतमय अष्टप्रकारी पूजा, महाआरती एवं वल्लभ वंदनावली का आयोजन हुआ, जिसमें श्रावक-श्राविकाओं और महिला मंडल ने गुरु भक्ति के भजनों की प्रस्तुतियां दीं।


45 श्रावक-श्राविकाओं ने किया आयंबिल तप, 72 दीपकों से सजा दरबार


गुरुदेव की पुण्यतिथि के अवसर पर 45 श्रावक-श्राविकाओं ने आयंबिल तप कर आत्म-साधना की। इस दौरान गुरु वल्लभ की प्रतिमा के समक्ष अक्षत चावल से गवली बनाई गई तथा श्रीसंघ के 72 श्रावक-श्राविकाओं ने एक-एक दीप प्रज्ज्वलित कर 72 दीपों की दीपमाला से गुरुदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
7 अक्टूबर को उवसग्गहरं स्तोत्र का सामूहिक पूजन-पाठ
तीन दिवसीय धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला में बुधवार, 7 अक्टूबर को सर्व संकट निवारण की भावना से श्रीसंघ द्वारा सामूहिक रूप से उवसग्गहरं स्तोत्र का पूजन-पाठ किया जाएगा। इस विशेष अनुष्ठान के लाभार्थी गुलाबचंद, कुमारचंद एवं विनोददेवी परिवार रहेंगे।
शिक्षा व समाज जागरण को समर्पित रहा गुरु वल्लभ का जीवन
चातुर्मास लाभार्थी सुरेंद्र बद्धाणी ने आचार्य विजय वल्लभ सूरिश्वरजी के जीवनवृत्त पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 26 अक्टूबर 1870 को जन्मे गुरु वल्लभ ने धर्म, शिक्षा, महिला कल्याण और साहित्य सुधार के क्षेत्र में अप्रतिम कार्य किया, जिससे उन्हें ‘पंजाब केसरी’ के नाम से जाना गया। उन्होंने बताया कि गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरिश्वर जी महाराज उनके शिक्षा-स्वप्न को साकार करने के लिए पुणे में जैन विश्वविद्यालय की स्थापना कर रहे हैं। आयोजन को सफल बनाने में पद्मप्रभु ट्रस्ट के पदाधिकारियों व श्रावक-श्राविकाओं का सराहनीय योगदान रहा।
