एतिहासिक पल- ब्रिटेन की संसद में पहली बार जैन धर्म की सांसद, शमा शाह ने ‘समणसुत्तं’ पर ली शपथ

एतिहासिक पल- ब्रिटेन की संसद में पहली बार जैन धर्म की सांसद, शमा शाह ने 'समणसुत्तं' पर ली शपथ
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quicjZaps 15 sept 2025
  • हाउस ऑफ लॉर्ड्स (House of Lords) में स्थान पाने वाली जैन समुदाय की पहली प्रतिनिधि बनीं शमा शाह
  • वैश्विक पटल पर गूंजे जैन धर्म के सिद्धांत; पूरे समाज के लिए गौरव और ऐतिहासिक प्रेरणा का क्षण

लंदन/बीकानेर, 31 मई । वैश्विक लोकतंत्र व वैश्विक राजनीति में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय तब लिखा गया, जब ब्रिटिश संसद के उच्च सदन ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ में पहली बार जैन समुदाय की एक सांसद ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह गौरवपूर्ण उपलब्धि शमा शाह (Baroness Shah of Wembley) को हासिल हुई है। उन्होंने ब्रिटेन की संसद में अपने पद की शपथ जैन धर्म के एक महत्वपूर्ण और सर्वमान्य पवित्र ग्रंथ ‘समणसुत्तं’ (Saman Suttam) पर ली, जिसे जैन समुदाय के लिए एक बड़ी मान्यता और सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

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भारतीय मूल की शमा शाह ब्रिटेन की संसद के इस प्रतिष्ठित ऊपरी सदन में स्थान प्राप्त करने वाली जैन समुदाय की पहली प्रतिनिधि बन गई हैं। इस गौरवशाली उपलब्धि के साथ ही उन्होंने ब्रिटिश संसद में जैन धर्म के पवित्र ग्रंथ ‘समणसुत्तं’ पर हाथ रखकर जनसेवा की शपथ ली, जो यूके के संसदीय इतिहास में अपने आप में पहली घटना है।

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‘समणसुत्तं’ पर शपथ लेना अत्यंत भावुक और सम्मानपूर्ण अनुभव: शमा शाह

हाल ही में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘ईस्टर्न आई’ (Eastern Eye) को दिए अपने एक विशेष साक्षात्कार (इंटरव्यू) में सांसद शमा शाह ने इस ऐतिहासिक पल के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ जैसे ऐतिहासिक और गरिमापूर्ण लोकतांत्रिक संस्थान में, अपने पवित्र धर्मग्रंथ ‘समणसुत्तं’ को हाथ में लेकर और अपनी अटूट आस्था के शब्दों के साथ लोक-कल्याण की शपथ लेना उनके लिए बेहद गहन, भावनात्मक और गौरवपूर्ण क्षण था। उन्होंने इस अवसर को अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक जरिया बताया।

क्या है ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ और इसका महत्व?
ब्रिटेन की संसद दो सदनों से मिलकर बनती है, जिसमें ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ को उच्च या ऊपरी सदन का दर्जा प्राप्त है। यह दुनिया के सबसे पुराने और प्रभावशाली विधिक संस्थानों में से एक है। इस सदन में देश-दुनिया की जानी-मानी हस्तियों, विचारकों, वैज्ञानिकों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाता है, जो ब्रिटेन के महत्वपूर्ण कानूनों, अंतरराष्ट्रीय नीतियों और जनहित के मुद्दों की सूक्ष्म समीक्षा व चर्चा करते हैं। ऐसे सर्वोच्च सदन में जैन समुदाय को प्रतिनिधित्व मिलना एक बहुत बड़ी राजनीतिक और सामाजिक सफलता है।

जैन सिद्धांतों की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक
शमा शाह की यह ऐतिहासिक उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत राजनैतिक सफलता मात्र नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों—अहिंसा, सत्य, संयम, अपरिग्रह और करुणा—की बढ़ती स्वीकार्यता और सम्मान का एक जीवंत प्रतीक है। आज के वैश्विक परिदृश्य में, जहां पर्यावरण संरक्षण और शांति की महती आवश्यकता है, वहां ब्रिटिश संसद में जैन धर्मग्रंथ की गूंज पूरे विश्व के जैन समाज और भारतीय प्रवासियों के लिए अत्यंत गर्व, हर्ष और नई ऊर्जा का संचार करने वाली प्रेरणा की मिसाल बन गई है।
पहली जैन सांसद
हाउस ऑफ लॉर्ड्स में शामिल होने वाली शमा शाह ब्रिटिश संसद के इतिहास में पहली जैन प्रतिनिधि बन गई हैं। यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि ब्रिटेन में बसने वाले पूरे जैन समुदाय की ओर से एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसने संसद के इस प्रतिष्ठित मंच पर अपनी पहचान सुनिश्चित की है।
‘समणसुत्तं’ पर शपथ: एक भावुक क्षण
शमा शाह ने अपने शपथ ग्रहण के अनुभव को बेहद भावुक और ऐतिहासिक बताया है। विश्व के सबसे पुराने लोकतांत्रिक संस्थानों में से एक में, अपने हाथों में अपने धर्मग्रंथ को लेकर, अपनी आस्था के मूल्यों के साथ जनसेवा की शपथ लेना उनके जीवन का सबसे सम्मानजनक क्षण था। उन्होंने एक साक्षात्कार में इसे “दो दुनियाओं के बीच एक पुल” बताया: आध्यात्मिक और नागरिक, व्यक्तिगत और राजनीतिक।

यह शपथ इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ‘समणसुत्तं’ पूरे जैन समाज (दिगंबर और श्वेतांबर) द्वारा संयुक्त रूप से मान्यता प्राप्त एक अद्वितीय ग्रंथ है। इसे 1974 में सभी प्रमुख जैन संप्रदायों के प्रतिनिधियों की एक समिति द्वारा जैन धर्म की शिक्षाओं को एक समान रूप देने के लिए तैयार किया गया था। इसमें 44 अध्याय और 756 श्लोक हैं।

शमा शाह कौन हैं?
शमा शाह की यह उपलब्धि उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और समर्पण का परिणाम है। ब्रिटेन की इस नई बैरोनेस की पृष्ठभूमि बेहद समृद्ध और प्रेरणादायक है।

शुरुआती जीवन और करियर: उन्होंने अपना करियर एक शिक्षिका के रूप में शुरू किया, जिसे वे ‘अहिंसा’ की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति मानती हैं। वर्ष 2014 में वह ब्रेंट काउंसिल की सदस्य बनीं और बाद में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी कार्य किया।

व्यक्तिगत संघर्ष: उनके पति रिचर्ड की 2016 में 36 वर्ष की आयु में कैंसर से मृत्यु हो गई थी। यह व्यक्तिगत क्षति उनके सार्वजनिक जीवन की नीतियों में करुणा, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने का एक महत्वपूर्ण आधार बनी।

जैन मूल्यों का प्रतिबिंब: उनके जीवन और राजनीति का मार्गदर्शन जैन धर्म के मूल सिद्धांतों – अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और अचौर्य – ने किया है।

एक वैश्विक संदेश
शमा शाह की यह उपलब्धि सिर्फ ब्रिटेन तक सीमित नहीं है। वैश्विक जैन समुदाय के लिए यह एक ऐतिहासिक घटना है। उनके माध्यम से, जैन समुदाय को न केवल ब्रिटिश संसद में प्रतिनिधित्व मिला है, बल्कि ‘अहिंसा’ और ‘करुणा ‘ जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को वैश्विक मंच पर भी एक मुखर आवाज मिली है। शमा शाह खुद इसे “शुरुआत मानती हैं, अंत नहीं”।

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