बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में एक और प्रसूता ने दम तोड़ा
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में एक और प्रसूता ने दम तोड़ा



- सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से अब तक दो की मौत
बीकानेर, 21 जून। बीकानेर के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी (सिजेरियन प्रसव) के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला थम नहीं रहा है। रविवार को अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही एक और प्रसूता शारदा नायक (26) की इलाज के दौरान मौत हो गई। सिजेरियन डिलीवरी के बाद अस्पताल में कुल 6 महिलाओं की किडनी फेल होने का गंभीर मामला सामने आया था, जिनमें से अब तक 2 प्रसूताओं की जान जा चुकी है। इससे पहले बीते 19 जून को सूरतगढ़ निवासी प्रीति (20) ने भी दम तोड़ दिया था। इस घटना के बाद से मृतका के परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।


चिकित्सकीय सूत्रों के अनुसार, शारदा नायक को गत 4 जून को पीबीएम अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां 5 जून को उसकी सिजेरियन डिलीवरी हुई। प्रसव के बाद अत्यधिक ब्लीडिंग (रक्तस्राव) न रुकने के कारण उसी दिन उसे तत्काल आईसीयू (ICU) में शिफ्ट किया गया था। पिछले 15 दिनों से वह लगातार वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी। डॉक्टरों के मुताबिक, महिला के शरीर में प्लेटलेट्स लगातार कम हो रहे थे और ऑक्सीजन का स्तर भी गिरता जा रहा था। शनिवार को तबीयत अधिक बिगड़ने पर डॉक्टरों ने श्वास नली डालकर अतिरिक्त ऑक्सीजन सपोर्ट भी दिया, लेकिन रविवार शाम करीब 6 बजे मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर के कारण उसने अंतिम सांस ली। अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने बताया कि किडनी के साथ-साथ अन्य अंगों के काम बंद करने से प्रसूता की मौत हुई है, हालांकि मरीजों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए थे।


दो जांच टीमें कर रही हैं मामले की पड़ताल
इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन का मानना है कि प्रसव के दौरान बाजार से मंगवाए गए ‘ऑक्सीटोसिन’ इंजेक्शन के इस्तेमाल के बाद ही एक-एक कर सभी 6 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी और उनकी किडनी फेल हो गई थी। प्रसूताओं की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें कई बार डायलिसिस पर भी रखा गया। वर्तमान में दो महिलाएं (तारा देवी और राहिला) ठीक होकर घर लौट चुकी हैं, जबकि दो अन्य प्रसूताएं (इमरती और कमला) अभी भी मेडिसिन और पोस्ट-कोविड आईसीयू में उपचाराधीन हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार के निर्देश पर दो उच्च स्तरीय जांच कमेटियां गठित की गई हैं। इसमें जोधपुर मेडिकल कॉलेज की एक विशेषज्ञ टीम पीबीएम अस्पताल में प्राथमिक जांच पूरी कर लौट चुकी है, जबकि ड्रग कंट्रोलर की कमेटी दवाओं के सैंपल और तकनीकी बिंदुओं पर विस्तृत जांच कर रही है। सरकार दोनों टीमों की फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगी।


