श्रीसांवलिया सेठ मंदिर में दान का रिकॉर्ड टूटा: 4 राउंड में ₹36 करोड़ पार, ₹40 करोड़ का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद

श्रीसांवलिया सेठ मंदिर में दान का रिकॉर्ड टूटा
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चित्तौड़गढ़, 27 नवंबर। मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्रीसांवलिया सेठ मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। 19 नवंबर से चल रही भंडार की गिनती में मात्र चार राउंड में ही 36 करोड़ 13 लाख 60 हजार रुपये की रिकॉर्ड राशि निकल चुकी है। मंदिर समिति का अनुमान है कि चेक, मनीऑर्डर और ऑनलाइन दान की गिनती के बाद कुल दान राशि 40 करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है, जिससे पिछले सभी रिकॉर्ड टूट जाएंगे।
क्यों आया दान में इतना बड़ा उछाल?
मंदिर समिति के अनुसार, इस बार भंडार को दो महीने के लंबे अंतराल के बाद खोला गया, जिससे चढ़ावा कई गुना बढ़ गया। यह परंपरा के अनुसार, दीपावली से पहले चतुर्दशी पर भंडार न खोले जाने और उसके बाद भीड़भाड़ के कारण हुए विलंब का परिणाम था।
रिकॉर्ड तोड़ गिनती: सिर्फ चार राउंड की गिनती में मिली ₹36.13 करोड़ की यह राशि, पिछले साल दीपावली के बाद दो महीने में मिले ₹34.91 करोड़ के वार्षिक रिकॉर्ड से भी अधिक है। यानी, केवल चार राउंड में ही पुराना रिकॉर्ड टूट गया।

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300 साल पुराना इतिहास और भृगु ऋषि का रहस्य
श्रीसांवलिया सेठ मंदिर का इतिहास लगभग 300 साल पुराना है। कथाओं के अनुसार, भादसोड़ा के बागुंड क्षेत्र में जमीन के अंदर से भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की तीन मूर्तियां मिली थीं, जिन्हें अलग-अलग स्थानों (भादसोड़ा, बागुंड और मंडफिया) पर स्थापित किया गया।

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चरण चिन्ह का रहस्य: इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि मूर्ति के सीने पर भृगु ऋषि के पैर का निशान उभरा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार, क्रोधित भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु के सीने पर लात मारी थी, जिस पर भगवान ने विनम्रता दिखाते हुए उनके चरण पकड़ लिए थे।

अद्वितीय दर्शन: इस चरण चिन्ह के दर्शन भक्तों को केवल सुबह 4:50 से 5:00 बजे तक, यानी केवल 10 मिनट के लिए ही होते हैं, जिसके बाद इन्हें वस्त्रों से ढक दिया जाता है। देश में किसी अन्य मंदिर में ऐसी परंपरा नहीं है।

चमत्कार से हुआ मंदिर का जीर्णोद्धार
मंदिर के वर्तमान भव्य स्वरूप के पीछे भी एक रोमांचक कथा है। कहा जाता है कि भिंडर रियासत के राजा मदन सिंह की नाव समुद्र में डूबने से बची थी, जिसके बाद उन्हें पूरा भगत (भादसोड़ा के निवासी) के बारे में पता चला। पूरा भगत की इच्छा पर राजा मदन सिंह ने मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार कराया, जिससे आज का विशाल मंदिर परिसर तैयार हुआ। मंदिर कमेटी को विश्वास है कि चेक, ड्राफ्ट और ऑनलाइन दान की गिनती पूरी होने के बाद इस बार का आंकड़ा निश्चित रूप से ₹40 करोड़ के पार जाएगा।

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