बीकानेर की बेटी का वैश्विक आविष्कार, आईआईटी बॉम्बे की शोधार्थी डॉ. निशा सारड़ा को मुड़ने वाले सोलर सेल पर मिला 20 साल का पेटेंट
आईआईटी बॉम्बे की शोधार्थी डॉ. निशा सारड़ा को मुड़ने वाले सोलर सेल पर मिला 20 साल का पेटेंट



- पारंपरिक सिलिकॉन पैनलों से आधी कीमत में तैयार होंगे प्लास्टिक शीट आधारित सोलर सेल्स; खिड़कियों और वाहनों पर भी पैदा होगी बिजली
बीकानेर/भीनासर, 22 जून । राजस्थान जहाँ एक ओर देश में सौर ऊर्जा के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है, वहीं दूसरी ओर सोलर प्लांट लगाने के लिए बड़े भू-भाग और जगह की कमी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए बीकानेर के भीनासर की बेटी डॉ. निशा सारड़ा ने एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में सौर ऊर्जा के पूरे परिदृश्य को बदल कर रख देगी। आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) से पीएचडी पूरी करने वाली डॉ. निशा द्वारा विकसित इस विशेष तकनीक को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने आधिकारिक तौर पर 20 वर्षों के लिए पेटेंट प्रदान किया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह कतरा-कतरा धूप को भी पूरी क्षमता के साथ बिजली में बदलने में सक्षम है।


डॉ. निशा सारड़ा ने आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर शैबल के. सरकार के कुशल निर्देशन में ‘लार्ज एरिया फेब्रिकेशन ऑफ फ्लेक्सिबल पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स’ विषय पर अपना शोध कार्य पूरा किया है। उनका यह अनुसंधान पारंपरिक सिलिकॉन पैनलों की तुलना में बेहद हल्के, लचीले (फ्लेक्सिबल) और किफायती सोलर सेल विकसित करने पर केंद्रित रहा। इसके तहत प्लास्टिक शीट पर आधारित लचीले सोलर सेल तैयार किए जा सकेंगे, जिन्हें आसानी से मोड़ा जा सकता है। डॉ. निशा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद शानदार रही है; उन्होंने बीकानेर इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक और देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) से एमटेक की डिग्री हासिल की, जिसके बाद उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में इस ऐतिहासिक शोध को अंजाम दिया।


कारों-बसों की छत और कांच की खिड़कियों पर भी लग सकेंगे ये पैनल; लागत होगी आधी
अपनी इस अनूठी तकनीक की विशेषताएं साझा करते हुए डॉ. निशा ने बताया कि इसका सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ यह है कि इसके निर्माण के बाद सोलर पैनलों को स्थापित करने के लिए केवल समतल या बड़ी जमीनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इन्हें किसी भी मुड़ने वाली सतहों, कारों व बसों की घुमावदार छतों, कांच के शोरूम, गोलाकार दीवारों, ऊंची इमारतों की बाहरी सतहों (Facades) तथा घरों की छोटी-छोटी छतों पर भी बेहद आसानी से चिपकने वाली शीट की तरह लगाया जा सकेगा। इससे सौर ऊर्जा उत्पादन का दायरा शहरी और सीमित क्षेत्रों में कई गुना बढ़ जाएगा। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, इस लचीली तकनीक से उत्पादित होने वाली बिजली की गुणवत्ता और प्रति यूनिट कार्यक्षमता में पारंपरिक पैनलों के मुकाबले कोई कमी नहीं आएगी। सबसे खास बात यह है कि प्रारंभिक आकलनों के मुताबिक, इन पेरोव्स्काइट आधारित लचीले पैनलों की निर्माण लागत वर्तमान में बाजार में उपलब्ध सिलिकॉन पैनलों की तुलना में लगभग आधी (50% कम) हो सकती है, जिससे यह आम जनता के लिए बेहद सुलभ हो जाएगी।


